0 प्रश्नपत्रों की प्रिटिंग मंे ई-टेण्डरिंग व्यवस्था को दिखाया ठेगा

0 आफिस के कंप्यूटर आपरेटर की फर्म से प्रश्नपत्र छपवाये

उरई । एक ओर जहां प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों की दुर्दशा सुधारने के लिये प्रयासरत है यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने जनपद के 95 परिषदीय विद्यालय अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिलाने के लिये चयनित किये गये हैं। लेकिन इसके उलट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने परिषदीय विद्यालयों की हाल ही में संपन्न हुयी वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों की प्रिटिंग कराने में हेराफेरी करने से नहीं चूके। लापरवाही का मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा प्रश्न पत्रों की प्रिटिंग कराने के लिये ई-टेण्डरिंग कराने का जोखिम भी नहीं उठाया और पहले से ही तयशुदा रणनीति के तहत कार्यालय के ही कम्प्यूटर आपरेटर की फर्म से प्रश्नपत्र प्रिटिंग करा लिये वह भी आधे-अधूरे। ताज्जुब की बात तो यह है कि कार्यदायी संस्था ने थोक के भाव में प्रश्नपत्रों को एनपीआरसी केंद्रों पर भिजवा दिया गया जबकि नियमानुसार छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयवार पैकिटों में पहुंचाया जाना चाहिए। गणित, विज्ञान व कलां विषय के प्रश्नपत्र प्रिटिंग नहीं कराये गये।

उक्त संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष व माण्डलिक मंत्री रामराजा द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान में बीएसए कार्यालय भ्रष्टाचार युक्त नीतियों से पोषित हो रहा है। यही कारण है कि प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सपनों को किस तरह से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जालौन चकनाचूर करने में लगे हुये हैं इसका अंदाजा हाल ही में परिषदीय विद्यालयों में संपन्न हुयी वार्षिक परीक्षाओं को देखकर लगाया जा सकता है। बीएसए ने प्रश्नपत्रों को प्रिटिंग कराने के लिये ई-टेण्डरिंग व्यवस्था का पालन नहीं किया तो वहीं भ्रष्टाचार का तड़का लगाते हुये अपने ही कार्यालय में कम्प्यूटर आपरेटर धीरू की निजी फर्म को उक्त कार्य कराने का जिम्मा सौंप दिया। हैरत की बात तो देखिये है कि प्रश्नपत्रों की प्रिटिंग कराने वाली फर्म ने गणित, विज्ञान, कला विषय के प्रश्नपत्र प्रिंट ही नहीं किये तो शिक्षकों ने बगैर प्रश्नपत्रों के ही परीक्षायें संपादित कराने को विवश हुये। कम्प्यूटर आपरेटर की निजी फर्म को ज्यादा से ज्यादा लाभ कैसे मिले इसका भी बीएसए राजेश शाही ने पूरा ख्याल रखा और जनपद की सभी एनपीआरसी केंद्रों पर थोक की संख्या में प्रश्नपत्रों को पहुंचा दिया गया। जबकि नियमानुसार प्रश्नपत्रों की प्रिटिंग करने वाली फर्म को विद्यालय में पंजीकृत छात्र संख्या के आधार पर अलग-अलग लिफाफों में पहुंचाया जाना चाहिये। उसके पहले सभी प्रश्नपत्रों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पहुंचाया जाना चाहिये था।

 

Leave a comment