
महाजाल में फंस रहे मगरमच्छ ,कछुआ एवं सूस
जंगल में लुप्तप्राय: सक्सी नामक जंतु की निर्मम हत्या
पंचनद न्यूज से विजय द्विवेदी
जगम्मनपुर-उरई । पंचनद के पानी में शिकार के लिए प्रतिबंधित कछुआ मगरमच्छ आदि जल जंतुओं का शिकार धड़ल्ले से हो रहा है ।
जनपद इटावा की सीमा में पंचनद की अथाह जलराशि में शासन द्वारा संरक्षित जल जंतुओं का शिकार धड़ल्ले से हो रहा है। ग्रामीणों की माने तो जनपद इटावा की सीमा में यमुना तथा चंबल नदी में जल जंतुओं की भरमार है जिसमें शासन द्वारा सेंचुरी क्षेत्र में शिकार के लिए प्रतिबंधित कछुआ , सूस, मगरमच्छ के अतिरिक्त सभी प्रकार की मछलियां भी है । यमुना चंबल में तो पंचनद संगम के पहले शिकार किया जाना कानूनन अपराध है । क्योंकि यह क्षेत्र शिकार करने के लिए प्रतिबंधित है फिर भी कुछ सेटिंग बाज स्थानीय इटावा पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों से सांठ गांठ कर रात में पानी के अंदर महाजाल डालकर शिकार करते हैं जिसमें वह दुर्लभ जल जंतु भी फस जाते हैं जो पानी की निर्मलता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है एवं पंचनद महत्व एवं विशेषताओं को प्रकट करने में विशेष भूमिका निभाते हैं ।
कछुआ पानी का प्राणी है कभी यहां एक कुंतल से 2 कुंतल बजन के कछुआ हुआ करते थे जो पानी में किसी भी प्रकार की गंदगी को चट कर जाते थे । बुजुर्ग बताते हैं कि पंचनद की यमुना चंबल आदि नदियों के किनारे किसी मृतक का अंतिम संस्कार कर पाना इन विशाल कछुओं के कारण मुश्किल से हो जाता था जैसे ही शव को नदी के किनारे रखते थे बड़े बड़े कछुआ शव को घसीटने का प्रयास करते लगते थे किंतु आज इन नदियों में अधभुजे शव तैरते नजर आ रहे हैं । जलीय जंतुओं का अभाव होने के कारण महीनों तक पानी में सडांध फैलाते हैं ।
शासन की तरफ से पंचनद संगम के ऊपर इटावा की सीमा में जलीय जंतुओं का शिकार प्रतिबंधित है । वन विभाग की चौकिया एवं वॉच टावर बने हैं लेकिन यह चौकियां एवं वॉच टावर पानी में शिकार करने बालों के लिए सहायक सिद्ध हो रहे हैं । शिकारियों के जाल में अति दुर्लभ जलीय जंतु सूस जो काला भैंस के जैसा किंतु मुलायम त्वचा का प्राणी है एवं मगरमच्छ भी अनैच्छिक हत्या के शिकार हो जाते हैं एवं बचे-खुचे कछुआ इन शिकारियों के जाल में फंसकर वाहरी व्यापारियों को महंगे दामों में बेचे जा रहे हैं । आश्चर्यजनक तो यह है कि जो अधिकारी कर्मचारी इन जंतुओं की सुरक्षा एवं रखवाली के लिए लगाए गए हैं वही शिकारियों से चंद रुपयों के लिए इनकी हत्या करवा रहे हैं । इटावा के बिठौली तथा सहसों थाने की पुलिस की काली कमाई का मुख्य जरिया यही नदियां एवं इन नदियों में होने वाला अवैध शिकार है ।
सक्सी उर्फ छीपी का शिकार
जल जंतुओं के अलावा जंगल में रहने वाला अति दुर्लभ प्राणी सक्सी उर्फ छिपी जो कई किलोमीटर लंबी सुरंग बनाकर रहता है उसका भी शिकार बहुत प्रयास करके किया जाता है । इसके शरीर का कोई हिस्सा कामोत्तेजक दवा बनाने के काम आता है अतः एक सक्सी का मूल्य 40 से 50 हजार रूपया तक मिल जाता है अतः धन के लालची ग्रामीण शिकारी इस दुर्लभ जानवर की हत्या बड़ी निर्ममता से कर रहे हैं ।
उक्त संबंध में वन विभाग का आगरा क्षेत्रीय कार्यालय संवेदनशील है । कई बार कार्यवाही भी हुई किंतु पुलिस की शह एवं वन विभाग कर्मचारियों के संरक्षण में चल रहे इस अवैध शिकार पर कोई प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है इस अद्भुत जीव के बारे में विशेष जानकारी करने पर वन्यजीव विशेषज्ञ और विश्व प्रकृति निधि के डॉ0 वीपी सिंह बताते हैं कि नदियों के किनारे, नम और जंगली इलाकों, घास के सूखे मैदानों में बिल बनाकर रहने वाला यह जीव चींटी आदि छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों को खाता है। इसी वजह से इसको चींटीखोर (Ant-Eater) कहा जाता है। डॉ0 सिंह कहते हैं कि यह भारतीय जीव है। इसकी तकरीबन नौ प्रजातियां होती हैं। अमेरिका आदि देशों में भी इसकी कुछ प्रजातियां मिलती हैं। यह सरीसृप (Reptiles) और स्तनधारी (Mammal) जीवों के बीच का जंतु है। यह अंडे देता है लेकिन अपने बच्चों को दूध पिलाता है ।
प्रभागीय वनाधिकारी उत्तर खीरी वन प्रभाग केके सिंह बताते हैं कि यह दुर्लभ जीव है। लुप्तप्राय इस जीव को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसी कारण श्रेणी-1 में रखा गया है। सभ्यता के विकास के साथ ही इनज जीव-जंतुओं को आवास की किल्लत तो होती ही जा रही है, इसके साथ ही लोगों की जीव-जंतुओं के साथ लगाव भी कम हो रहा है। इसके शरीर पर मौजूद शल्क इसके सुरक्षा कवच का काम करते हैं। बाघ आदि जानवर इसको बहुत पसंद करते हैं लेकिन खुद पर हमला होते ही यह खुद को गोलाकार लपेट लेता है। तब इसके शल्क इसको बचाते हैं।




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