उरई। प्रतिज्ञा हो तो भीष्म जैसी शायद ऐसी ही कुछ भावना के कारण माधौगढ़ के तहसीलदार न केवल बिना पैसे लिए किसी कागज पर दस्तखत न करने की अपनी आन पर अटल रहते हैं बल्कि सरेआम अपनी इस प्रतिज्ञा का हवाला भी लोगों से देते हैं।
वर्तमान राज्य सरकार भ्रष्टाचार खत्म होने या कम किये जाने का ढिंढ़ोरा चाहे जितना पीटे लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। इतना ही नही सरेआम घूस मांगने वाले अधिकारियों की न तो कहीं कोई चौकसी हो रही है और न कोई कार्रवाई इसलिए उनके हौसले इस समय जितने बुलंद हैं, पहले कभी न रहे होगें।
बुधवार को पत्रकार राजा सिंह राजावत अपने पिता जगदीश सिंह निवासी पूरनपुरा का हैसियत प्रमाण पत्र लेने माधौगढ़ तहसील पहुंचे। जिसकी सारी औपचारिकताएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। लेकिन कर्मचारियों ने राजा राजावत को बताया कि उनके हैसियत प्रमाण पत्र पर तहसीलदार साहब के दस्तखत होने को रह गये हैं। क्योंकि उनका फरमान है कि जब तक आवेदक उनसे नही मिल लेगा वे दस्तखत नही करेगें।
इस पर राजा तहसीलदार शिवप्रसाद के साथ उनके चैंबर में पहुंच गये। जैसे ही उन्होंने अपनी बात कही, शिवप्रसाद तत्काल बोले कि वे बिना रुपये लिए किसी कागज पर दस्तखत नही करते। जब राजा ने उन्हें अपने पत्रकार होने का परिचय दिया तो उन्होंने कहा कि यह परिचय मुख्यमंत्री योगी या डीएम को जाकर दो। उन्होंने जो कह दिया वह अटल हैं। पैसे दे जाओ और हैसियत प्रमाण पत्र ले जाओ वरना तहसील के चक्कर काटते रहो।
राजा उनके इस दुस्साहस से स्तब्ध रह गये। क्या इस प्रदेश में विजीलेंस और एंटीकरप्शन जैसे विभागों में ताला पड़ गया है जो इतनी ठर्रस से पैसे मांगने वाले अधिकारी भी सींखचों के पीछे होने की बजाय ठाट से कुर्सी पर जमे हुए हैं।





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