उरई। बिना भ्रष्टाचार के भी किसी अधिकारी को शासन-प्रशासन से इतना अभयदान मिल सकता है। किस्सा जिले के बेसिक शिक्षाधिकारी राजेश शाही का है। जिन्होंने सरकारी स्कूलों का भटटा बैठा दिया है। फिर भी उनका बाल बांका होता नजर नही आ रहा है।
किसी सरकार में इतना नाकारापन बर्दास्त नही किया गया जितना मौजूदा सरकार में दिख रहा है। जनपद में सबसे बुरा हाल बेसिक शिक्षा विभाग का है। सरकारी स्कूल खुल नही रहे फिर भी डयूटी पर न जाने वाले टीचर कार्रवाई से बचे रहते हैं क्योंकि खंड शिक्षाधिकारी से लेकर बीएसए के यहां तक उनका महीना बधा रहता है। जालौन के उपजिलाधिकारी ने गत तहसील दिवस के दिन कस्बे के ही एक स्कूल को चार-चार टीचर होते हुए भी बंद पाया था। पहले भी ऐसा हो चुका है लेकिन बीएसए राजेश शाही को कोई परवाह नही है।
उनके भ्रष्टाचार और निकम्मेपन की सबसे बुरी मार जालौन ब्लाक के भदवां ग्राम के प्राइमरी स्कूल के बच्चे और अभिभावकों पर पड़ रही है। इस स्कूल की कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका अपनी करतूतों की वजह से निलंबित कर दी गईं। लेकिन उन्होंने आज तक स्कूल की चाबी किसी को नही दी है जिसके कारण एक महीने से स्कूल में ताला पड़ा है। स्कूल के बच्चे जिलाधिकारी कार्यालय आकर गुहार लगा चुके हैं लेकिन फिर भी स्कूल नही खुल सका है। जबाव में बीएसए ने यही जानकारी भेज दी कि प्रधानाध्यापिका निलंबित हैं और चार्ज नही दे रहीं। एसडीएम जालौन ने भी अनौपचारिक तौर पर स्वीकार किया कि यह रिपोर्ट ध्रष्टता की इंतहा है। बीएसए को अगर जरा भी शर्म होती तो यह रिपोर्ट देने की बजाय निलंबित शिक्षिका के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखवाकर स्कूल खुलवा देते लेकिन धन्य हैं बीएसए। जाहिर है कि बीएसए की यह जुर्रत इसलिए है कि ऐसे अधिकारियों को वर्तमान में दामाद की तरह ट्रीट किया जा रहा है।

Leave a comment