जालौन-उरई। अंधेर नगरी बेभूल राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा की कहावत चरितार्थ की जा रही है। लोगों के दुख-दर्द की अर्जियों को शासन-प्रशासन में कोई महत्व नही मिला रहा।
इसका उदाहरण है बिजली विभाग का मनमर्जी का खेल। जिससे आम जनता काफी समय से परेशान चली आ रही है। विभाग जनसमस्याओं का कोई निस्तारण नही कर रहा है। अधिक बिल आना विभाग की ओर से एक मुख्य समस्या है। लेकिन इनमें से एक का भी निस्तारण नही हुआ। खंड विकास कार्यालय में अधिक बिल की समस्या को लेकर पूर्व खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार से लेकर वर्तमान खंड विकास अधिकारी सुदामा शरण तक कई बार बिजली विभाग को सूचित कर चुके हैं कि पशु चिकित्सा तथा बाल विकास कार्यालय के संयोजन खंड विकास कार्यालय के विद्युत पोल से जोड़ दिये गये हैं जो अधिक बिल आने का कारण है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब सरकारी विभागों की भी सुनवाई नही होती तो आम उपभोगता की सुनवाई बिजली विभाग क्या करता होगा।
हालांकि उपभोक्ता पर दबंगी दिखाने का मामला हो तो बिजली विभाग की तेजतर्रारी देखती ही बनती है। लोगों में इसके कारण बिजली विभाग के प्रति आक्रोश चरमसीमा पार करता जा रहा है।

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