कोंच-उरई । गर्मी की आमद के साथ ही कस्बे में जल संकट गहराने लगा है, इसका बड़ा कारण है जल संस्थान की उदासीनता और रखरखाव का अभाव जिसके चलते तकरीबन सैकड़ा भर हैंडपंप रीबोर के लिये लंबित पड़े हैं और कमोवेश इतने ही छोटी मोटी कमी के कारण दम तोड़ चुके हैं। जल संस्थान का जबाब बहुत ही चौंकाने बाला है, जब इनके पास शिकायत आती है तभी इनका स्टाफ उक्त हैंडपंप को देखने जाता है, इसमें अजीब यह भी है कि केवल देखने भर की औपचारिकता पूरी की जा रही है उनकी रिपेयरिंग नहीं। होना तो यह चाहिये कि जल संस्थान स्वयं ही खराब हैंडपंपों की तलाश करे और उन्हें सूचीबद्घ करके क्रमबद्घ तरीके से उनकी रिपेयरिंग होनी चाहिये।

 

 

 

गौरतलब है कि मार्च खत्म होने को है और तापमान बढने के साथ ही भूगर्भ जल का स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। मौसम का संकेत तो यही है कि आने बाले दिनों में गर्मी की तपन लोगों को और भी झुलसायेगी। ऐसी स्थिति में कस्बे बासियों को पीने के पानी की भारी किल्लत बढती जा रही है। इसका ठोस कारण तो यही है कि कस्बे में स्थापित कुल 547 हैंडपंपों में से दो सैकड़ा हैंडपंप अपना दम तोड़ चुके हैं। इनके बंद पड़े होने के भी कई कारण हैं, अव्वल तो एक सैकड़ा हैंडपंप रीबोर की सूची में अपनी पुर्नस्थापना की बाट जोह रहे हैं जबकि लगभग इतने ही हैंडपंप छोटी मोटी खराबियों के कारण पानी देने से इंकार कर रहे हैं। तहसील परिसर में अधिकारियों की नाक के नीचे बंदीगृह के पीछे का हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है लेकिन इसका पुरसा हाल पूछने बाला कोई नहीं है। कैलिया बस स्टैंड, नईबस्ती के तिलक नगर में रामप्रकाश गौतम के सामने आदि स्थानों के हैंडपंप भी ठूंठ की तरह खड़े व्यवस्था को मुंह चिढा रहे हैं। पूरे पालिका क्षेत्र के पच्चीसों वार्डों में हैंडपंपों की स्थिति काफी खराब है। ऐसे में नागरिकों का क्या हाल हो रहा होगा है, इसका अनुमान लगा पाना ज्यादा कठिन नहीं है। गौरतलब यह भी है कि जल संस्थान की पाइप लाइन से होने बाली वाटर सप्लाई के लिये कुल नौ नलकूप स्थापित हैं लेकिन एकाध नलकूप को छोड़ दें जहां सीवर लाइनें नहीं हैं तो इस सप्लाई का पानी पीने योग्य बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि इनमें सीवर की गंदगी मिला पानी आता है लिहाजा इसका उपयोग नागरिक अन्य कामों में करते हैं जबकि पीने के लिये नागरिक इन्हीं हैंडपंपों पर निर्भर हैं।

 

 

जनता की नहीं सुन रहे अधिकारी-रावत

समस्याओं को लेकर मौजूदा स्थिति को लेकर ब्राह्मïण महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत खासे खफा हैं, उनका कहना है कि अधिकारी अपने में मस्त हैं और जनता की समस्याओं की तरफ न तो अधिकारी ही ध्यान दे रहे हैं और न सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि जिससे जनता की तकलीफें बढती ही जा रहीं हैं। खराब हैंडपंपों की ओर स्वत: संज्ञान लेकर अधिकारियों को इस समस्या का निदान प्राथमिकता के जानेमाने रंगकर्मी सूर्यदीप सोनी का मानना है कि खराब हैंडपंपों में अधिकांश उन स्थानों पर स्थापित हैं जो सार्वजनिक स्थल हैं, जैसे बस स्टैंड, तहसील, विद्यालय या अन्य ऐसी जगहें जहां लोगों की आमदरफ्त ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा है कि कई बार शिकायतों के बाबजूद अधिकारियों का समस्या पर कान नहीं देना बहुत ही दुखद है क्योंकि इन समस्याओं का निराकरण नहीं होने से सीधे तौर पर जनता ही प्रभावित हो रही है। अधिकारियों को इस समस्या पर फोकस करना चाहिये।

 

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