उरई । एक तरफ प्रदेश सरकार गत वर्ष सितम्बर माह में विनियमितीकरण सम्बन्धी पत्रांक आधारित पत्र भेजकर समस्त मानदेय प्रवक्ताओं की जानकारी लेकर उनमें आशा का संचार करती है, दूसरी तरफ उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग लगभग दस-बारह वर्ष पुराने विज्ञापन की नियुक्तियाँ करने के लिए अंतिम परिणामों की घोषणा कर देता है. इस तरह का दोहरा रवैया समझ से बाहर है. यदि इतने पुराने विज्ञापन की नियुक्तियाँ अब की जाती हैं तो इससे बहुत से मानदेय प्रवक्ता बेरोजगार हो जायेंगे. यह कहीं न कहीं विगत एक दशक से अधिक समय से कार्य कर रहे मानदेय शिक्षकों के भविष्य पर कुठाराघात है. उक्त विचार गाँधी महाविद्यालय, उरई के हिन्दी विभाग के मानदेय प्रवक्ता डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने इस सम्बन्ध में आयोजित एक बैठक में व्यक्त किये. उन्होंने आगे बताया कि जनपद जालौन के विभिन्न अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत मानदेय प्रवक्ताओं के अलावा पूरे प्रदेश में वर्तमान में लगभग सात सौ से अधिक मानदेय प्रवक्ता कार्यरत हैं. प्रदेश सरकारों द्वारा समय-समय पर उनके विनियमितीकरण की प्रक्रिया चलाई जाती रही किन्तु गत वर्ष के अलावा किसी भी समय उसको पूर्ण नहीं किया गया. गत वर्ष लगभग एक सौ पचास मानदेय प्रवक्ता विनियमित किये गए. इसके बाद पिछले माह उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के गठन के बाद से एक दशक से अधिक पुराने विज्ञापन के परिणाम जारी कर उनकी नियुक्तियां करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इससे बहुत से मानदेय प्रवक्ताओं की नौकरी चले जाने का खतरा है. मानदेय प्रवक्ताओं के हितों से लिए बराबर संघर्ष करने वाले डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा कि विनियमितीकरण को लेकर कई बार उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा गया, समय-समय पर मानदेय प्रवक्ताओं के प्रतिनिधि-मंडल ने उनसे मुलाकात भी की मगर कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया. अब विज्ञापन संख्या 37 के परिणाम घोषित होने के बाद भी उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा गया है मगर अभी तक मानदेय प्रवक्ताओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के सम्बन्ध में कोई आश्वासन नहीं मिला है.
कालपी कॉलेज, कालपी में समाजशास्त विभाग के मानदेय प्रवक्ता डॉ० विनीत चतुर्वेदी का कहना था कि आयोग और सरकार चाहे तो मानदेय प्रवक्ताओं की जगह पर नियुक्तियां करने के स्थान पर अन्यत्र रिक्त पदों पर पुराने विज्ञापन की नियुक्तियां कर सकता है. विगत लगभग सात-आठ वर्षों से आयोग द्वारा नियुक्तियां न होने से प्रदेश में अनेक पद रिक्त पड़े हुए हैं. इससे आयोग पुराने विज्ञापन की नियुक्तियां भी कर लेगा और मानदेय प्रवक्ताओं का भविष्य भी सुरक्षित बना रहेगा. गाँधी महाविद्यालय के धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि अब सरकार को मानदेय प्रवक्ताओं के विनियमित किये जाने की तरफ ध्यान देना चाहिए. वैसे भी पिछले वर्ष सूचना माँगी गई थी, ऐसे में माना जाना चाहिए कि विनियमितीकरण की प्रक्रिया चलन में है. इस स्थिति में आयोग को नियमतः मानदेय प्रवक्ताओं के सापेक्ष नियुक्तियां करनी नहीं चाहिए. डॉ० सुनीता गुप्ता का कहना था कि विगत एक-डेढ़ दशक से अधिक समय के कार्यरत मानदेय प्रवक्ताओं को अब बाहर निकाला जाता है तो न केवल उनका भविष्य अंधकारमय होगा वरन उनके पाल्यों का भी भविष्य खतरे में आ जायेगा. लम्बे समय से महाविद्यालयों में कार्य करने के कारण उनके सामने पुनः नया कार्य खोजने का संकट आ जायेगा. यह बहुत ही विषम स्थिति होगी.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पुराने विज्ञापन संख्या 37 की नियुक्तियों को अन्यत्र पदों पर करने और मानदेय प्रवक्ताओं को विनियमितीकरण करने के सम्बन्ध में एक माँग-पत्र उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा जायेगा. सरकार से निवेदन किया जायेगा कि वह सात सौ से अधिक मानदेय प्रवक्ताओं और उनके परिवार के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए सार्थक कदम उठाने का, उनके हितार्थ निर्णय लेने का कष्ट करें. बैठक में डॉ० राधा रानी श्रीवास्तव, डॉ० ऋचा पटैरिया, डॉ० के०के० गुप्ता, डॉ० अनूप शुक्ल, डॉ० स्वप्निल भट्ट, डॉ० रोहित पाठक, डॉ० के०के० त्रिपाठी, डॉ० विजय विक्रम सिंह सहित कई मानदेय प्रवक्ता उपस्थित हुए.।







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