उरई। जमीन के किराये संबंधी विवाद के कारण अनुसूचित जाति, जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम का फर्जी मुकदमा चलाना मंहगा पड़ गया जब इस मामले में पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर मानहानि के फौजदारी मामले के लिए अदालत ने गैस ऐजेंसी संचालक सहित दो लोगों को नोटिस जारी कर दिया।
बताया गया है कि जालौन में एचपी गैस एजेंसी संचालक भाईयों शिवशक्ति सिंह और शिवराज सिंह ने जमीन के किराये को लेकर मोहल्ला बापू साहब निवासी धर्मेंद सक्सेना से हुए विवाद के चलते उनके खिलाफ अनुसूचित जाति, जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम का परिवाद न्यायिक मजिस्ट्रेट जालौन की अदालत में दायर कर दिया। बाद में अदालत ने उनके परिवाद को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया तो उन लोगों के द्वारा जिला स्तर पर रिवीजन दायर कर दिया गया। जिसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी ने की। उन्होंने भी परीक्षण के उपरांत उनके रिवीजन को अस्वीकार कर दिया। इतने पर भी शिवराज सिंह को संतोष नही हुआ और उन्होंने इसके विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में अपील दायर की लेकिन उच्च न्यायालय में भी उनकी अपील अमान्य हो गई।
इसे लेकर धर्मेंद्र सक्सेना के अधिवक्ता हरीओम मिश्रा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट जालौन की अदालत में परिवाद दायर किया। जिसमें कहा गया कि शिवराज सिंह और शिवशक्ति सिंह ने उक्त फर्जी मुकदमें के जरिये उनके मुवक्किल का मान-सम्मान समाज में गिराने की कोशिश की जो कि बीएसएनएल के अधिकृत फ्रेंचाइजी और सामजिक व्यक्ति हैं। इसलिए उनका कृत्य आपराधिक उददेश्य से प्रेरित मानते हुए उनके विरुद्ध धारा 500 भारतीय दण्ड विधान की कार्रवाई शुरू की जाये। उनके परिवाद पर जालौन के न्यायिक मजिस्ट्रेट विनय कुमार ने शिवराज सिंह व शिवशक्ति सिंह को परीक्षण के लिए तलब करने हेतु सम्मन जारी कर दिये। यह मुकदमा जालौन कस्बे में फिलहाल चर्चा का विषय बन गया है।







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