उरई। गर्मियों में पेयजल संकट से लोगों को राहत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। इसके तहत शासन स्तर से प्रतिदिन पेयजल व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। शुक्रवार को इसी क्रम में ग्राम्य विकास विभाग के विशेष सचिव सुरेंद्र राम ने यहां पहुंचकर पेयजल प्रबंधों का जायजा लिया। वे पूरे बुंदेलखंड के दौरे पर निकले हैं।
जालौन जिले में अपने पहले दिन विशेष सचिव ने बजीदा और मिनौरा की पेयजल परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उनके साथ यूनिट कोर्डिनेटर आरसी त्रिपाठी और पेयजल विशेषज्ञ इं. बृजेंद्र कुमार लिटोरिया भी थे।
उन्होंने बजीदा में ओवर हैड टैंक पर चढ़ने के लिए बनाई गई सीढ़ियों की व्यवस्था पर असंतोष प्रकट किया। उन्होनें कहा कि इसकी रेलिंग हिल रही है जिससे दुर्घटना हो सकती है। इसलिए रेलिंग दोबारा बनवाई जाये। इस दौरान उन्होनें जल निगम के अभियंताओं को हिदायत दी कि पेयजल परियोजनाओं में किसी तरह की कोताही नही बरती जानी चाहिए। अगर इन निर्देशों की अनदेखी की तो कड़े परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने इस दौरान बताया कि घरों का गंदा पानी पेयजल परियोजना के समीप ही भरता है। जिससे नलकूप का डिस्चार्ज प्रभावित हो सकता है। इस पर विशेष सचिव ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिया कि वे जल भराव खत्म करायें।
मिनौरा पेयजल परियोजना की संचालन की लोगबुक भरी नही मिली जिस पर उन्होंने आपरेटर को फटकार लगाई। उन्होंने यहां डीपीआरओ से कहा कि वे ग्राम पंचायतों से जल कर की वसूली करायें तांकि पेयजल परियाजनाओं का रखरखाव ठीक तरीके से हो सके।
बाद में उन्होंने विकास भवन में सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने रुटीन के निरीक्षण में जिस गांव में भी जायें वहां पेयजल संसाधनों का निरीक्षण अवश्य करें और इसकी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को दें। उन्होंने कहा कि पेयजल से संबंधित हर समस्या का निराकरण प्राथिमिकता के आधार पर किया जाये। कंट्रोल रूम में इस बाबत आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण करायें। उन्होंने कहा कि ठप्प हैंडपंपों का रीबोर पंचायतों के माध्यम से चौदहवें वित्त आयोग के बजट के जरिये कराया जाये।

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