
कानपुर। फालूदा दो बीवियों के बीच हास्यास्पद परिस्थितियों में फंसे पति की गुदगुदाने वाली फिल्म है। पूरे दो घंटे तक दर्शक अपनी सीट से हिल भी न सकेंगे। यह बात आज यूनाइटेड पब्लिक स्कूल सिविल लाइंस में अनुकृति रंगमंडल कानपुर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में 18 मई को ऑल इंडिया रिलीज हो रही हिन्दी फिल्म फालूदा के लेखक/निर्देशक धीरज सिंह ने बातचीत के दौरान कही। उनके साथ फिल्म फालूदा के हीरो ऑरव नैगी व उसकी पहली पत्नी का किरदार कर रही गूंज भी मौजूद थीं। उक्त दोनों कलाकार मूल रुप से उत्तराखंड के हैं। पहली बार स्वतंत्र रुप से फिल्म निर्देशित कर रहे धीरज सिंह ने बताया कि आज फिल्म बनाने से ज्यादा मुश्किल काम रिलीज करना है।

ऑरव, गूंज व धीरज ने पत्रकारों व कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिये। इस मौके पर डा. ओमेन्द्र कुमार, प्रो इन्द्र मोहन रोहतगी,अनिल गौड़, संजय शर्मा, राधेश्याम दीक्षित, महेश दुबे, सुरेश श्रीवास्तव, विजयभान सिंह, अंकिता शुक्ला, आरती, सुमित गुप्ता, मनोहर सुखेजा, विजय भास्कर, उमेश शुक्ला, कमल गौतम, अनामिका जायसवाल, हिमांशु कटारिया, शिरीष सिन्हा, स्वयं कुमार समेत बड़ी संख्या कला प्रेमी मौजूद रहे।







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