
* दिन में नीचे तो रात में ट्रॉली के ऊपर रातें गुजार रहे हैं किसान
* मजदूर भी हुये बेकाम, कैसे जलें घरों के चूल्हे
कोंच-उरई एक तरफ सरकार किसानों की हितैषी बनने का ढिंढोरा पीट रही है और समर्थन मूल्य पर किसानों का गेहूं खरीदने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत कुछ दूसरी ही है, अधिकांश गेहूं खरीद केन्द्र विभिन्न कारणों के चलते ठप हो गये हैं और जिन खरीद केन्द्रों पर तौलाई चल रही है वहां भी हफ्तों से से किसान डेरा डाले अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। हालात यह हैं कि अपनी गेहूं लदी ट्रॉलियां क्रय केन्द्रों के बाहर खड़ी किये हैं और रातें ट्रॉली के ऊपर तथा दिन ट्रॉली के नीचे गुजारने की उनकी मजबूरी है। क्रय केन्द्रों पर काम बंद होने से मजदूर भी फाकाकशी की नौबत है और उनके घरों के चूल्हे जलने में टोटा दिखाई दे रहा है।

सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 1735 रुपये घोषित कर देने के बाद किसानों का गेहूं खरीदने के लिये तमाम क्रय केन्द्र स्थापित किये गये हैं। अकेले कोंच कस्बे में ही ग्यारह केन्द्र काम कर रहे हैं जिसमें नौ मंडी समिति परिसर में तथा सहकारी क्रय विक्रय समिति एवं एलएसएस जुझारपुरा अपने समिति परिसर में खरीद कर रहे हैं। खरीद को लेकर बने ताजा हालातों पर अगर गौर करें तो कमोवेश तीन क्रय केन्द्रों पर खरीद पूरी तरह ठप पड़ी है जबकि दो पर वारदाने का रोना होने की बजह से खरीद का काम ठप है। सबसे बड़ी समस्या खरीदे गये माल की उठान नहीं होने के कारण क्रय केन्द्रों पर और माल रखने की जगह नहीं बची है सो केन्द्र संचालकों ने खरीद से हाथ खींच लिये हैं। केन्द्र संचालकों की परेशानी जगह और वारदाने का अभाव बताया गया है। इसके अलावा कुछ केन्द्रों के बंद होने से आरएफसी, एफसीआई और पीसीएफ केन्द्रों पर किसानों की भीड़ बढी है। तमाम किसानों को आठ से लेकर दस दिनों तक के नंबर अलॉट किये गये हैं जिसके चलते किसान अपनी ट्रॉलियां इन केन्द्रों पर खड़ी किये अपनी बारी के इंतजार में दिन रात वहीं पड़े हैं। ट्रॉली के ऊपर रात गुजार रहे बब्बूराजा चमरसेना, अनिल तिवारी खैरी, देवेन्द्रकुमार नायक आदि का कहना है कि उन्हें अपनी ट्रॉली पर बैठे चार दिन हो गये हैं, न घर की सुध है और न ही कोई अन्य काम वे कर पा रहे हैं। मौसम का मिजाज अलग बिगड़ा हुआ है, अगर कहीं बारिश होती है तो उनका सारा माल भीग जायेगा।






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