माधौगढ़-उरई। बारिश और तूफान की पहले से भविष्यवाणी के बावजूद क्रय केंद्रों पर खरीदे जा रहे गेंहूं की हिफाजत के लिए कोई प्रयास नही किये गये।
अधिकारियों और कर्मचारियों को इस सरकार में जितनी छूट महसूस हो रही है उतनी शायद वे पहले कभी नही कर पाये होगें। सरकार की कार्यक्षमता पर इस मनमानी के चलते प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं लेकिन शायद उनमें सच्चाई है इसलिए सरकार चाह कर भी हालात संभाल नही पा रही।
गेंहूं खरीद केंद्र में लापरवाही और भ्रष्टाचार के इस बार नये कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। मौसम की पूर्व सूचना प्राकृतिक आपदा के संबंध में बराबर प्रसारित हो रही है। फिर भी रविवार को जब पानी बरस रहा था तो स्थानीय मंडी में खरीदे गये गेंहूं पर तिरपाल ढांकने तक की व्यवस्था नही की गई थी। इस कारण खरीदा गया गेंहूं बड़ी मात्रा में गीला हो गया। इस रवैये से सरकार और किसान दोनों को नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन जब सरकार में कोई धनी धोरी रह ही नही गया है तो जो हो जाये क्या फर्क पड़ता है।







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