उरई। जिला बार एसोसिएशन का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को राधिका गार्डन में आयोजित किया गया। जिला बार के इतिहास में यह सबसे भव्य और वृहद शपथ ग्रहण समारोह रहा जिससे यादगार बन गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वितीय ने इसमें पदाधिकारियों को शपथ दिलाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला जज चंद्रशेखर प्रसाद ने की। बार काउंसिल उत्तर प्रदेश के पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव और अपर महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश शासन रमेश कुमार सिंह भी विशिष्ट अतिथियों में शामिल रहे। संचालन पूर्व डीजीसी सिविल रमाकांत द्विवेदी ने किया।
प्रशासनिक न्यायाधीश ने सबसे पहले अध्यक्ष करन सिंह राजपूत और महासचिव अनुज कुमार शर्मा को शपथ दिलाई। अन्य पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों को जिला जज चंद्रशेखर प्रसाद ने शपथ ग्रहण कराई। कार्यक्रम के आरंभ में वरिष्ठ अधिवक्ता और साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी द्वारा रचित अभिनंदन गीत अतिथियों के स्वागत में गाया गया।

माधौगढ़ में स्थापित होगा ग्रामीण न्यायालय
इस अवसर पर प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल कुमार ने जनपद में न्याय व्यवस्था से संबंधित मांगों और समस्याओं को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि इस बारे में जनपद न्यायाधीश से उन्होंने चर्चा की है और अपने स्तर की कार्रवाइयों के बारे में शीघ्र कदम उठाने का भरोसा उन्होनें दिलाया है। उन्होंने कहा कि कालपी में कोई न्यायिक अधिकारी न होने की ओर उनका ध्यानाकर्षित कराया गया। इस बारे में उन्होंने रास्ते में आते समय बात कर ली है जल्द ही व्यवस्था हो जायेगी।
कोंच में बताया गया कि वहां कोर्ट केंटीन में चल रही है। नई कोर्ट बनाने के लिए सरकार के स्तर पर प्रस्ताव विचाराधीन है। वे इस प्रस्ताव को मूर्त रूप दिलाने के लिए अपने स्तर से प्रभावी पैरवी का भरोसा दिलाते हैं। एक कोर्ट में न्यायाधीश का स्थान रिक्त है। इसकी पूर्ति के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। माधौगढ़ में उन्होंने ग्रामीण न्यायालय की शीघ्र स्थापना का भरोसा दिलाया।
प्रशासनिक न्यायाधीश ने कहा कि बुंदेलखंड उनकी जन्मभूमि है। इसलिए बुंदेलखंड जिसमें जालौन जिला भी शामिल है के प्रति उन्हें विशेष अनुराग है। उनके कार्यकाल में इस क्षेत्र का कोई अधिवक्ता कभी भी उनसे संपर्क कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी कामना है कि जालौन जनपद न्यायिक तनाव मुक्त जनपदों में अग्रणी बने। बार और बेंच के बीच ठनने का कोई अवसर यथा संभव न आने दिया जाये। उन्हें जानकारी दी जायेगी तो वे इसमें मदद के लिए अविलंब हस्तक्षेप को तत्परता प्रदर्शित करेगें।

वादकारी वकीलों के देवता, उनके हित को दें सर्वोच्च प्राथमिकता
बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने अपने भाषण में अधिवक्ताओं के जमीर को जमकर झकझोरा। उन्होंने कहा कि जो देता है वही देवता होता है। इसलिए अधिवक्ताओं के देवता मुवक्किल हैं क्योंकि अधिवक्ताओं के सारे ठाट-बाट मुवक्किलों के पैसे पर टिके हुए हैं। अदालतों में वादकारी का हित सर्वोच्च लिखा जरूर रहता है लेकिन यह लिखावट केवल अंलकारिक और दिखावटी है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में हड़ताल के लिए कोई जगह नही है लेकिन फिर भी वकील आये दिन हड़ताल करते हैं। अधिवक्ता समाज मुवक्किलों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हैं। एक तो मुकदमों के अनुपात में जजों के पद कम हैं। उस पर भी तमाम रिक्तियां हैं। फिर अधिवक्ताओं की हड़ताल इससे वादकारियों का भारी नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि वकीलों के लिए अपने देवता की सबसे बड़ी सेवा यह है कि उन्हें जल्द न्याय मिले। उन्होंने अपना उदाहरण दिया। बताया कि वे गरीब, विधवा, छात्र और मंदिर-मस्जिद के मुकदमें बिना पैसा लिए लड़ते हैं। सप्ताह में एक दिन वे मुवक्किलों की निःशुल्क सेवा करते हैं। सभी वकीलों को इसी तरह का व्रत लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वकील समाज के सामने उदाहरण पेश करने के लिए मां-बाप की सर्वोपरि पूजा के मामले में उदाहरण प्रस्तुत करें। जिस घर में मां-बाप की पूजा होगी उसमें कभी अव्यवस्था पैदा नही हो सकती। लीक से हटकर उनके भाषण को अधिवक्ता समुदाय में जमकर सराहा गया।
जिला बार एसोसिएशन ने इस बार एक नई परंपरा जोड़ी। जिसके तहत 50 वर्ष से अधिक की प्रेक्टिस करने वाले पांच वरिष्ठतम अधिवक्ताओं को प्रशासनिक न्यायाधीश के हाथो से सम्मानित कराया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि गण भी उपस्थित रहे जिनमें विधायक माधौगढ़ मूलचंद निरंजन, विधायक कालपी नरेंद्र पाल सिंह जादौन, नगर पालिकाध्यक्ष उरई अनिल बहुगुणा, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, दयाशंकर वर्मा और संतराम सिंह सेंगर उल्लेखनीय रहे।

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