उरई। अंधाधुंध कर वसूली की आड़ में सरकार लूट की एजेंसी बनकर रह गई है। नेशनल हाइवे पर आटा के पास गैर कानूनी टोल वैरियर चलाकर इसी का नमूना पेश किया जा रहा है।
ध्यान रहे कि आटा और एट के टोल वैरियर निर्धारित दूरी के मानक को पूरा नही करते। इसलिए इनमें से एक टोल वैरियर वैसे भी नही होना चाहिए था। साथ में आटा टोल वैरियर तो इसलिए पूरी तरह अवैधानिक है कि नेशनल हाइवे कुछ ही दूरी पर कालपी के पास आज तक कम्पलीट नही हो पाया। जिससे रोजाना कालपी में किलोमीटरों लंबा जाम लगता है। जाहिर है कि इसको देखते हुए उक्त क्षेत्र में टोल टैक्स वसूलने का कोई अधिकार सरकार को नही है।
कोढ़ में खाज की स्थिति यह है कि सरकार आटा टोल पर नंगई से वसूली करवा रही है। इस अवैध टोल वैरियर पर टैक्स की दरें सबसे ज्यादा हैं। लाइट चार पहिया वाहन का नबावगंज के टोल पर एक तरफ का शुल्क 70 रुपये लिया जाता है जबकि आटा में 80 रुपये शुल्क वसूल किया जाता है। शुल्क की यह बढ़ोत्तरी हाल में की गई है लेकिन किस अधिकार के तहत और किस पैमाने से यह स्पष्ट करने को एनएचआई के अधिकारी तैयार नही हैं। टोल पर कोई वाहन चालक अगर बेजा दर से वसूली पर आपत्ति करता है तो वहां मौजूद ठेकेदार के हथियारबंद लोग उसके साथ मारपीट करने से नही हिचकते। कई बार आटा टोल स्टाफ के खिलाफ दर्ज हो चुके मुकदमों से इसकी गवाही मिलती है।
बार संघ के सचिव अनुज शर्मा ने कहा कि जनहित के मामलों में मौजूदा बार एसोसिएशन बिना किसी शुल्क के कानूनी लड़ाइयां लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत आटा में हो रही टोल वसूली को भी संज्ञान में लिया जा रहा है। वे जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत टोल के सारे आवश्यक विवरण एकत्रित करके सक्षम न्यायिक प्राधिकरण में इस मामले को दायर करेगें।

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