कोंच-उरई । सुप्रसिद्घ सिने स्टार और छोटे पर्दे पर अपनी प्रतिभा की धाक जमाने बाले बुंदेलखंड के कलाकार देवदत्त बुधौलिया ने कहा है कि रंगमंच ऐसी बिधा है जिससे कलाकार में निखार आता है लेकिन इसके लिये सतत् अभ्यास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रंगमंच पर गल्तियां सुधारने का मौका नहीं मिलता है लिहाजा अगर अच्छा कलाकार बनना है तो रंगमंच की शरण में जाना ही पड़ेगा। यह बात उन्होंने स्थानीय कमला नेहरू बालिका इंटर कॉलेज में ‘दर्पणÓ की प्रशिक्षण की कार्यशाला के दौरान पत्रकारों से कही।

उन्होंने कहा कि आज रंगमंचीय बिधा बिलुप्त होती जा रही है। इसके पीछे यद्यपि तमाम कारण हो सकते हैं लेकिन सरकार द्वारा इस दिशा में किसी तरह की सकारात्मक पहल नहीं किया जाना इसका बड़ा और अहम् कारण है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बिधा के संरक्षण के लिये प्रभावी पहल करनी चाहिये और ऐसी संस्थाओं जो इस बिधा को जीवंत बनाने में लगी हैं, को अनुदान देकर प्रोत्साहित करना चाहिये। उन्होंने भोजपुरी की तर्ज पर बुंदेलखंड में भी फिल्म इंडस्ट्री बनाने की जोरदार वकालत की। फिल्म और रंगमंच के आधारभूत अंतर को पारिभाषित करते हुये उन्होंने कहा कि फिल्म मेकिंग में जब तक शॉट ओके नहीं हो जाता है तब तक कितने भी रीटेक लिये जा सकते हैं लेकिन रंगमंच पर रीटेक के लिये कोई जगह नहीं है, इसलिये रंगमंचीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिये काफी होमवर्क करना पड़ता है और मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती है। बुंदेली पृष्ठभूमि पर उन्होंने फिल्म बनाने को लेकर कहा कि यहां की ऐतिहासिक गाथाओं पर काफी अच्छी फिल्में बनाई जा सकती हैं लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत फाइनेंसरों का नहीं मिल पाना है लेकिन हताश होने की जरूरत नहीं है, जल्दी ही लोगों की समझ में आयेगा कि इस काम में काफी अवसर हैं।

 

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