विनय गुप्ता
उरई। बुंदेलखंड में बारिश की स्थिति पूर्व के वर्षों की भांति ही है।  पिछले दस वर्षों से सूखे की मार झेल रहा बुंदेलखंड इस वर्ष भी सूखे की दहलीज पर खड़ा है। जालौन में बारिश का एक माह गुजर जाने के बाद भी महज 80 एमएम बारिश ही हो सकी जो सामान्य से 200 एमएम कम है। बुंदेलखंड में बारिश को लेकर हुई सभी भविष्यवाणी फेल साबित हो रही हैं।
मालूम हो कि पिछले कई वर्षों से बुंदेलखंड सूखे की मार झेल रहा है। यहां की सत्तर फीसदी आबादी में किसान हैं जो खेती के सहारे अपना गुजर-बसर करता है। यही नहीं जालौन का अधिकांश व्यवसाय किसानों के बल पर टिका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड के जालौन में 16 जून से 11 जुलाई तक बारिश के आंकड़ों से किसान परेशान है। यहां लगभग एक माह में 80 एमएम बारिश हुई जो सामान्य से बहुत कम है। वर्ष 2012 में 81.67 एमएम बारिश रिकार्ड की गई थी। इसी के साथ 2015 में 137.86 एमएम बारिश जिले में हुई थी। वर्ष 2016 में 89.60 एमएम बारिश जिले में रिकार्ड की गई थी। 2017 में 62.7 एमएम बारिश सरकारी आंकड़ों में दर्ज है। इन वर्षों में बुंदेलखंड ने भीषण सूखा झेला है। यही नहीं खरीफ के लिए 20 दिनों में बारिश नहीं हुई तो खरीफ की बुआई 70 से 80 फीसदी नहीं हो सकती। जिन किसानों के पास नलकूप हैं उन्हीं की फसल की बुआई संभव है। फिलहाल किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है।
इनसेट–
भूगर्भ के सूखे स्ट्रेटा को भी बारिश की जरूरत
यदि इस वर्ष भी सामान्य बारिश नहीं होती है तो समूचे बुंदेलखंड में पेयजल का भारी संकट आ सकता है क्योंकि इस वर्ष भूगर्भ जल स्तर बारिश कम होने से 40 से 50 फीट नीचे चला गया है जिसके चलते हैंडपंपों ने पानी देना छोड़ दिया है। भूगर्भ के 3 स्ट्रेटा में 2 स्ट्रेटा सूख चुके हैं। अब बारिश का सहारा है जो भूगर्भ के सूखे स्ट्रेटा में पानी ला सकता है।

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