उरई। गत मंगलवार की रात आटा थाने के संदी ग्राम मेें आतंकवादी अंदाज में राह चलते बदमाशों द्वारा की गई फायरिंग में दो लोगों की मौत और तीन के गंभीर रूप से घायल हो जाने की सनसनीखेज वारदात का खुलासा हो गया है। इसके पीछे पुरानी रंजिश और उसको लेकर चले संगीन वारदातों के सिलसिले की कहानी सामने आई है। पुलिस ने उक्त मामले में पिता और उसके तीन पुत्रों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के दावे के मुताबिक आरोपियों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में जानकारी देते हुए बताया कि संदी कांड में अल्ला रख्खू उर्फ पप्पू व उसके तीन बेटों चांद बाबू उर्फ चांद मोहम्मद उर्फ वीराना, आसिफ और सोहेल को गिरफ्तार किया गया है। जिनके कब्जे से चार तमंचे, कई कारतूसों सहित बरामद किये गये। घटना में इनके द्वारा प्रयोग की कई दो मोटर साइकिलें भी पुलिस ने जब्त कर ली हैं।
पुलिस अधीक्षक के मुताबिक पूंछतांछ में अल्ला रख्खू उर्फ पप्पू ने बताया कि उसके पिता बाबू खां और बम्हौरी निवासी मंसूर खां आपस में साढ़ू थे। मंसूर ने जब अपने गांव में एक महिला की लूट के दौरान हाथ-पैर काटकर हत्या कर दी तो उसे बम्हौरी से भागना पड़ा। उसके पिता बाबू खां ने इस पर उसे संदी में शरण दे दी। लेकिन मंसूर खां ने विश्वासघात करके उसके मकान पर कब्जा कर लिया और एक दिन उसके पिता बाबू खां की हत्या कर दी।
पप्पू ने बताया कि पिता की हत्या का बदला लेने के लिए उसने मंसूर के जेल में होने के दौरान उसके 10 वर्षीय पौत्र साहिब को मार डाला। नतीजतन उसे जेल जाना पड़ा। साहिब के बाप मकसूद ने इसके कारण उसकी अंधी बहन माजिदा और मां रसूलिन की हत्या कर दी। इस पर वह जेल से बाहर निकला और मकसूद की हत्या की घात में जुट गया। इस क्रम में उसने मकसूद पर फायर किया लेकिन वह बच निकला।
अल्ला रख्खू उर्फ पप्पू का कहना है कि संदी के लोग उसका साथ नही देते थे। जबकि मकसूद के पक्ष में पूरा गांव गवाही देता था। इसलिए उसने गांव छोड़ दिया और कदौरा कस्बे में जाकर मोहल्ला इस्लामाबाद में बस गया। एक साल पहले जब उसके साले मुन्ना की लड़की नूरबानों की शादी मकसूद ने जबर्दस्ती पुखरायां निवासी अपने भांजे से करा दी तो उसके जख्म फिर हरे हो गये। इसी दौरान उसका लड़का चांद बाबू फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करने लगा। इस दौरान जब वह संदी में फेरी लगा रहा था तो मंसूर के लोगों से उसका विवाद हो गया जिसमें आजाद ने उसके साथ गाली-गलौज की और थप्पड़ मार दिये।
नतीजतन बदले की भावना से वह और उसके लड़के खूंखार हो गये। उन लोगों ने पहले 29 जुलाई की रात में वारदात को अंजाम देने की तैयारी की थी लेकिन उस दिन बारिश हो गई जिससे कोई बाहर नही लेटा। इसके बाद वह और उसके लड़के लौट आये। 31 जुलाई को वह अपने लड़कों के साथ रात में फिर संदी पहुंच गया। उसने बाहर सो रहे आजाद की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद मंसूर का साथ देने की चिढ़ की वजह से रास्ते में अन्य गांव वालों पर भी गोली चलाई। इसमें एक महिला की और मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गये।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अल्ला रख्खू के खिलाफ 15, चांद बाबू के खिलाफ 9, सोहेल के खिलाफ 3 और आसिफ के खिलाफ 2 मुकदमें पहले से कायम हैं। यह पूरा परिवार संगीन अपराधी है। संदी की लोमहर्षक वारदात के जल्द खुलासे से जहां पुलिस प्रशासन को राहत की सांस मिली वहीं क्षेत्र में गहराया असुरक्षा का माहौल भी काफी हद तक ठीक हो गया है।

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