उरई। सरकार के तुगलकी फैसले के कारण प्रदेश भर के डिस्पोजल व्यापारी बर्बादी की कगार पर पहुंच गये हैं। उरई में 31 और जिले भर में 80 डिस्पोजल कारोबारी हैं जिन्होंने पिछले दो दिनों से अनिश्चित काल के लिए अपनी व्यापार बंदी शुरू कर दी है।
डिस्पोजल व्यापार एसोसिएशन के नगर अध्यक्ष मो. साजिद खान, उपाध्यक्ष मनीष माहेश्वरी, जालौन के नगर अध्यक्ष साबिर और राजकुमार गुप्ता ने बताया कि डिस्पोजल व्यापार पर रोक लगाने का फैसला अचानक लिया गया। जबकि उनका लाखों रुपये का माल अभी डंप है और बेशुमार उधारी भी फसी हुई है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने उनके माल को खपाने के लिए सिर्फ 15 दिन का समय दिया था जो एकदम नाकाफी है। अगले 6 महीने तक कोई सहालग भी नही है। इसलिए माल खपे तो कहां खपे। सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नही है। एक ओर वह व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने की बात करती है। दूसरी ओर कारोबार जगत को दफन करने के लिए उसके द्वारा खंदक खोदी जाती है।
व्यापारी नेताओं ने कहा कि उन्हें कम से कम एक वर्ष की मोहलत दी जानी चाहिए। तांकि पहले से तैयार जो स्टाक है उसे वे खपा सकें और अपनी पूरी उधारी वसूल कर सकें। उन्होंने कहा कि व्यापारी अपराधी नही हैं। इसलिए वे सरकार की ओर से रियायत के हकदार हैं। अगर सरकार ने न सुनी तो अन्य व्यापारियों को भी शामिल करके इसका जबर्दस्त विरोध किया जायेगा। चुनाव में भी सत्तारूढ़ पार्टी को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।






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