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कोंच-उरई । पिछले एक पखवाड़े से बिजली की धुआंधार कटौती के कारण अब पानी सिर से ऊपर निकलता जा रहा है। न दिन में चैन और न रात में आराम की स्थिति में लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर इस सुरसामुख समस्या से राहत कैसे मिले। इसी बीच भगतसिंह नगर स्थित 33 केवी विद्युत उपकेन्द्र पर रखा मुख्य आपूर्ति बाला 5 एमवीए का ट्रांसफार्मर अचानक फुंक जाने के कारण समस्या और भी गंभीर हो गई है, आधा कोंच अंधेरे में समा गया है। दूसरा नया ट्रांसफार्मर लगाने में अभी दो तीन दिन का समय लग सकता है तब तक विभागीय अधिकारी प्रभावित मोहल्लों में वैकल्पिक बिजली आपूर्ति देने का प्रयास कर रहे हैं।
दिन में और में भी कमोवेश दो दो घंटे की आकस्मिक कटौती का दंश झेलने के बाद रात में भी लोगों को चैन नहीं है, कई कई घंटे गुल रहने के कारण इस भीषण गर्मी में लोग बिलबिला रहे हैं। कुल मिला कर सारी रात लोगों आंखों में गुजारने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर कस्बाई लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है जो कभी भी फूट कर सड़कों पर आ सकता है। कहने को तहसील मुख्यालय पर बीस घंटे की उपलब्धता की बात मौजूदा सरकार कहती आ रही है लेकिन आकस्मिक कटौती के नाम पर धुवांधार कटौती से जनता का बुरा हाल है। इसके अलावा नियमित कटौती और लोकल फॉल्ट में घंटों बिजली गुल रहने से लोगों को इस भीषण उमस भरी गर्मी में काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रहीं हैं। कटौती के लगातार बढते जा रहे घंटों ने आम आदमी की चिंतायें बढाने के साथ साथ उनका खून भी खौलाने का काम भी शुरू कर दिया है। आये दिन पब्लिक तथा विरोधी राजनैतिक दलों की ओर से आंदोलन आदि की धमकियों से बेअसर सरकार और सरकारी तंत्र कोंच वासियों को ऐसी मुंदी मार दे रहे हैं कि जनता चीखती चिल्लाती नजर आ रही है। बिजली आपूर्ति की मौजूदा स्थिति बताती है कि सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह फेल हो चुकी है और लगता है कि इस भीषण गर्मी में अभी हालात सुधरने की कोई उम्मीद भी नहीं है। इधर, रविवार को भगतसिंह नगर स्थित 33 केवी बिजलीघर का ट्रांसफार्मर फंकने से कोढ में खाज जैसी स्थिति बन गई है। एसडीओ विमलकुमार का कहना है कि बिजलीघर तक पहुंचने बाला रास्ता भी दलदल से भरा होने के कारण वाहन वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और नया ट्रांसफार्मर लगाने में दिक्कतें आ सकती हैं। फिलहाल, अभी नया ट्रांसफार्मर आने में ही तीन चार दिन का वक्त लग सकता है तब तक के लिये प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति दिये जाने के वैकल्पिक प्रयास किये जा रहे हैं।






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