उरई। रामपुरा ब्लाक में जगम्मनपुर बाया हमीरपुरा, हुसैपुरा बिलौहा मार्ग की बदहाली विकास के ढिढ़ोरे का मुंह चिढ़ाता है। इलाके के दर्जनों गांवों के लोग अरसे से इसके कारण नारकीय परेशानी भोग रहे हैं। लेकिन उनकी तकलीफ से हमदर्दी की फुर्सत न किसी जन प्रतिनिधि को है न अधिकारियों को।
मार्ग की सबसे खराब हालत जगम्मनपुर में विद्युत सबस्टेशन से लेकर हुसेपुरा तक 1 किलोमीटर टुकडे़ की है। जहां सालों से जल भराव की समस्या देखी जा रही है। बारिश में तो जल भराव विकराल रूप धारण कर लेता है। दरअसल इस जगह सड़क नीची है और नाली ऊपर। 15 हजार की आबादी वाले जगम्मनपुर और समीपवर्ती हुसैपुरा गांव की पूरी जल निकासी इसी नाली से होती है जबकि नाली टूटी हुई है। नतीजतन यहां गंदे पानी का तालाब भर जाता है।
जगम्मनपुर एजूकेशन हब का रूप ले चुका है जहां प्राइमरी से लेकर इंटर कालेज और डिग्री कालेज तक की श्रंखला है। आसपास के कई गांवों से छात्र-छात्राएं जगम्मनपुर आते हैं। जिन्हें बरसात में घुटनों तक कीचड़ में धसकर निकलना पड़ता है। हमीरपुरा, हुसैपुरा, रतनपुरा, उदोतपुरा, छौना, मानपुरा, धूता, बहराई, लड़ऊपुर, लिटावली, बहादुरपुर, कंझारी, पतराही, बिलौंहा आदि गांवों का मुख्य बाजार जगम्मनपुर है और प्रसव, इलाज आदि के लिए भी उन्हें जगम्मनपुर की ओर रुख करना पड़ता है। ऐसे में सड़क की हालत उनके लिए जानलेवा संकट का कारण बन जाती है।
जगम्मनपुर के नजदीक पचनद महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है जिसे पांच नदियों के संगम के कारण तीथराज भी कहा जाता है। जिसको संवारने के लिए राज्य सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट हाल ही में मंजूर किया है। लेकिन जगम्मनपुर गांव के अंदर सड़क की यह हालत इसकी सार्थकता को मटियामेट करती नजर आती है तो भी इस ओर कोई गौर नही करना चाहता। बहरहाल अब प्रभावित गांवों के लोगों का असंतोष ज्वालामुखी बन रहा है जिसकी झलक ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से जिला मुख्यालय पर ट्रैक्टर लाकर कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी में दिखाई दे रही है।

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