कोंच-उरई । यहां गढी स्थित गणेश सेवा समिति के पंडाल में जारी श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में भक्ति और प्रेम की ऐसी रसधार बह रही है कि श्रोता उसमें आनंदित हो रहे हैं। विद्वान कथा प्रवक्ता साध्वी आस्था व्यास ने आज की कथा में भगवान को विश्वास का बिषय बताते हुये कहा कि परमात्मा की परीक्षा कभी नहीं लेनी चाहिये, वह तो विश्वास का बिषय है। उन्होंने बताया कि माता सती ने परमात्मा की परीक्षा ली जिसके कारण पति शिव का साथ छूटा और परमात्मा भी रूठ गया।

गणेश सेवा समिति के तत्वाधान में गढी पर चल रही भागवत कथा में कथा व्यास ने कहा कि भगवान वेद व्यासजी को सोलह पुराणों की रचना करने के बाद भी जब शांति नहीं मिली तो उन्होंने देवर्षि नारदजी के कहने पर भागवत ग्रंथ लिखा जो मानव की आत्मशांति के लिये ही है। भागवतजी में प्रेम, भक्ति एवं कर्तव्यपालन की प्रेरणायें बार बार दी गई हैं जिनका तत्व सार यही है कि ईश्वर ने जो कर्तव्य दिये हैं उनका मर्यादा पूर्वक पालन करते हुये भगवद्भजन करें तो भगवान पिता, पुत्र, मित्र, सखा जैसे किसी भी रूप में अवश्य ही प्राप्त होगा। माता अनुसूइया ने किसी देवी देवता की पूजा नहीं की बल्कि अपने पत्नी होने का धर्म निभाया और महान पतिव्रता होने का गौरव प्राप्त किया तथा पुत्र रूप में परमात्मा को प्राप्त किया। इसके विपरीत माता सती ने भगवती होने पर भी अपने पत्नी धर्म का पालन नहीं किया, शिवजी की बात नहीं मानी, रामजी की परीक्षा ली, पति के रोकने पर भी पिता के घर गईं जिसका परिणाम यह हुआ कि उनसे शिव छूटे, राम भी रूठे और अंत में अपना शरीर भी त्यागना पड़ा। बाद में पार्वती के रूप में उन्हें शिव की प्राप्ति हो सकी। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने जिसे जो भी दायित्व सौंपा है उसका ईमानदारी के साथ निर्वहन करने पर परमात्मा प्रसन्न होता है। परीक्षित प्रदीप भदौरिया और नीलम भदौरिया ने भागवत जी की आरती उतारी, अंत में प्रसाद वितरित किया गया। समिति के अध्यक्ष अमित सोनी, मंत्री कन्हैया नीखर, राहुल तिवारी, सुधीर सोनी, गौरव सोनी, सूर्यदीप सोनी, त्रषि झा सहित तमाम कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में रहे।

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