उरई। युवा स्वाभिमान ट्रस्ट ने मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में बेसिक शिक्षा की जनपद में बदहाल हालत का खुलासा अधिकारियों के सामने किया। इसमें बताया गया है कि कैसे कई स्कूल भवन न होने के कारण लावारिस हालत में संचालित हो रहे हैं। कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनमें मात्र एक कक्ष में सारी कक्षाएं लगती हैं और दफ्तर भी उसी कक्ष में चलता है। स्कूलों में मिडडे मील तो बनता है लेकिन बच्चों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही है। फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी आंखों पर पटटी बांधे रहते हैं। जाहिर है कि सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर सरकार भले ही हर जिले में करोड़ों रुपये बहा चुकी हो लेकिन सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव होने की वजह से आम लोगों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा की कल्पना दुराशा साबित हो रही है।
युवा स्वाभिमान ट्रस्ट के अध्यक्ष अरविंद पहारिया ने बताया कि उनके ट्रस्ट ने सरकारी सेक्टर में चल रहे बेसिक स्कूलों की हालत को सुधरवाने के लिए अभियान चलाने का बीड़ा उठाया है क्योंकि देश की बहुतायत गरीब आदमी के नौनिहालों का भविष्य संवारने का जिम्मा इन्ही स्कूलों के कंधे पर है। जमीनी हकीकत यह है कि सर्व शिक्षा अभियान के इतने वर्षों से संचालन के बावजूद इन स्कूलों में सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई के नाम पर खानापूरी की जा रही है। जिससे गरीब परिवारों के लिए सुनहरे मुस्तकबिल का सपना देखा जाना मुमकिन नही रह गया है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में अपने संगठन के माध्यम से कराये गये सर्वे में प्रकाश में आये बदहाल स्कूलों की दयनीय दशा अधिकारियों के सामने लाई गई। उदाहरण के तौर पर माधौगढ़ विकास खंड के निचावड़ी गांव में सन 2003 में डीपीईपी के तहत प्राथमिक विद्यालय मंजूर कर दिया गया था। लेकिन आज तक इसका भवन बनवाने की सुध नही ली गई। इस वजह से यह स्कूल मंदिर में चलाया जा रहा है और पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। इसी विकास खंड के कुरौती के प्राथमिक विद्यालय की 1 से लेकर 5 तक की कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित हो रही हैं। उसी कमरे में विद्यालय का दफ्तरी काम भी होता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल के नाम पर यह कैसा मजाक किया जा रहा है। इसी विकास खंड के खुदातपुरा के प्राथमिक विद्यालय में आज तक चाहरदीवारी का निर्माण नही कराया गया। जबकि विद्यालय के पास ही गहरा तालाब है जिसकी वजह से नन्हें-मुन्नों के साथ हादसा होने का अंदेशा अभिभावकों को हमेशा सताता रहता है। तहसील जालौन के ग्राम सदूपुरा के प्राथमिक विद्यालय का एकल कक्ष क्षतिग्रस्त है। जिसके कारण बच्चे यहां हमेशा भय के माहौल में रहते हैं।
अरविंद पहारिया ने बताया कि उनके संगठन द्वारा हर विकास खंड में प्राथमिक विद्यालयों का सर्वे जारी है और उनका निश्चय है कि प्रत्येक संपूर्ण समाधान दिवस में किसी न किसी तहसील में वे बदहाल स्कूलों को लेकर ज्ञापन देगें तांकि हालात बदले जा सकें।






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