* दोपहर से प्रारंभ हुई मैया की विदा यात्रा देर शाम पडऱी स्थित हुल्का देवी मंदिर पर हुई समाप्त

उरई। जालौन जनपद के कोंच कस्बे में प्रत्येक तीसरे बर्ष आयोजित होने बाली बहुचर्चित  बड़ी पूजा में शनिवार को हुल्का मैया को भावभीनी विदाई देने के लिये जनसमुद्र उमड़ पड़ा। लोगों ने अपने अपने प्रतिष्ठान बंद कर इस बड़ी पूजा में सहभागिता की और मैया को छोडऩे हुल्का देवी मंदिर तक 4 किलो मीटर  नंगे पांव गये। मौसम ने भी आज पूरा साथ दिया, कल हुई मूसलाधार बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया जिसके चलते भक्तों को थोड़ी सहूलियत हो गई। सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों पर देवी देवता घंटों खेले और अंतत: रेलवे क्रॉसिंग पर जाकर ही वे शांत हुये। बजरिया स्थित लाला हरदौल के स्थान से प्रारंभ होकर मुख्य राजमार्ग पर लगभग चार किमी की यात्रा कर मैया की शोभायात्रा गंतव्य तक पहुंची। सैकड़ा भर स्थानों पर यात्रा मार्ग में भंडारों की व्यवस्थायें विभिन्न कमेटियों और संस्थाओं द्वारा की गई थी। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किये गये थे। इस दौरान नगर का पूरा बाजार बंद रहा, सभी शिक्षण संस्थायें भी बंद रहीं, यहां तक कि सैकड़ों घरों में ताले लटके रहे।

पिछले तकरीबन पखवाड़े भर से इस बड़ी पूजा की तैयारियां हो रहीं थीं। महिलाओं ने हरदौल मंदिर पर जाकर गांठ बंधाई की रस्में निभाई। आयोजन कमेटी के लोग कई दिन पूर्व ही नगर के सभी मंदिरों और लोक देवताओं के स्थानों पर जाकर उन्हें न्यौता देने की रस्म भी पूरी कर चुके थे। शनिवार को सुबह साढे सात बजे लाला हरदौल मंदिर से झंडा लेकर आस्थावानों की टोली सबसे पहले गांधीनगर स्थित धोबिन बऊ के यहां सुहाग लेने पहुंची, इसके बाद गाजे बाजे के साथ नईबस्ती स्थित पुराने दिवाले तथा गंगाराम पटेल के यहां मुख्य घुल्ले को लेने सैकड़ों की संख्या में महिलायें और पुरुष गाजे बाजे के साथ पहुंचे। इसके बाद सभी लोग एक बार पुन: हरादौल मंदिर पर इकट्ठा हुये, महंतजी के यहां से टिपरिया आई और दोपहर लगभग 12 बजे मैया की विदाई का आयोजन शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ जिसमें सभी नंगे पांव थे और महिलाओं के केश खुले हुये। तीन सेर वेसन से बनी हुल्का मैया की सुंदर प्रतिमा को रथारूढ कराया गया और फिर गगनभेदी जयकारों के साथ उनका डोला उठ चला। यात्रा प्रारंभ होने के अवसर पर इलाकाई विधायक मूलचंद्र निरंजन, उरई सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, पालिकाध्यक्षा डॉ. सरिता वर्मा, उनके प्रतिनिधि आनंद अग्रवाल, पूर्व बारसंघ अध्यक्ष द्वय विज्ञान विशारद सीरौठिया, बारसंघ अध्यक्ष विनोद अग्निहोत्री, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेन्द्र यादव,  हरिश्चंद्र तिवारी, आनंद दुवे, ब्राह्मïण महासभा महामंत्री अनुरुद्घ मिश्रा आदि भी मौजूद रहे। आयोजन कमेटी लाला हरदौल सेवा समिति बजरिया के चक्रपाणि दास महंत, सुदर्शनपाणि दास महंत, अध्यक्ष श्यामदास ककइया, मंत्री नरेश वर्मा आदि ने जरूरी औपचारिकतायें पूरी करते हुये यात्रा शुरू की। शोभायात्रा बजरिया स्थित गुदड़ी होती हुई मुख्य राजमार्ग पर आगे बढती रही और जनसमुद्र साथ होता गया। सैकड़ों पुरुषों और महिलाओं पर मैया की सवारी आई और वे झूमते हुये यात्रा में आगे बढते रहे। मैया हुल्का डोले में अत्यंत सुंदर लग रहीं थीं। यह जन सैलाब मैया के जयकारे लगाता हुआ मंथर गति से आगे बढता रहा और सेंवढा कुआ, पुरानी व नई स्टेट बैंक, चंदकुआ, चौकी तिराहा, बस स्टैंड होता हुआ जब रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंचा तो साथ की सभी महिलायें परंपरानुसार यहां से बापिस अपने घरों को लौट गईं। रेलवे क्रॉसिंग पर सभी घुल्ले भी शांत हो गये। देर शाम लगभग मैया का डोला पडऱी नाका स्थित हुल्कादेवी मंदिर पहुंचा जहां उनके रथ में काले बकरे जोत कर रथ को खेतों में छोड़ दिया गया। शोभायात्रा में आगे आगे ले जाये जा रहे वाराहों की वहां बलि दी गई। पूरे मार्ग में दूध, गंगाजल और मदिरा की तीन धारायें अनवरत चलती रहीं। इन धाराओं के पीछे मान्यता है कि यात्रा मार्ग में मिलने बाली अदृश्य शक्तियां अपने अपने भोज्य के अनुसार उन्हें ग्रहण करती चलें। शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा के बहुत ही पुख्ता इंतजाम किये गये थे, एसडीएम गुलाब सिंह, कोतवाल देवेन्द्र सिंह, एसएसआई दिलीप वर्मा, एसओ नदीगांव अरुणकुमार तिवारी भारी पुलिस बल और पीएसी तथा भारी संख्या में अद्र्घ सैनिक बल के जवान लगातार यात्रा पर नजरें गड़ाये रहे।

 

सैकड़ा भर स्थानों पर लगाये गये भंडारे

ऐतिहासिक बड़ी पूजा के अवसर पर जहां समूचे नगर ने इस आयोजन में सहभागिता की, वहीं तमाम स्वयंसेवी और सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगभग सैकड़ा भर स्थानों पर भंडारों और पेयजल के अलावा स्वल्पाहार की व्यवस्था भी यात्रा मार्ग में की गई थी। बजरिया से प्रारंभ होकर हर दस कदम पर ऐसे आयोजनों ने लोगों के यात्रा परिश्रम को कम करने में काफी मदद की। खैरा वाट स्कूल पर शिक्षक संघ की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया था। गल्ला व्यापारियों की ओर से भंडारे की व्यवस्था थी जिसमें अजय गोयल, धु्रवप्रताप सिंह, विनोद दुवे, बॉबी पचीपुरा, हरीश तिवारी, राममोहन रिछारिया, सोहन वाजपेयी, केशव बबेले, राजकुमार अग्रवाल सहित तमाम व्यापारी मौजूद थे। पहारिया की चक्की के सामने, सांसद की गली में, केशरीमल तरसौलिया के मकान पर, जॉनी मिश्रा के मकान पर, सेंवढा कुआ पर, अमर चंद्र इंटर कॉलेज, गहोई धर्मशाला, छावला की पुलिया, गुदरिया हनुमान मंदिर, बस स्टैंड, स्टेट बैंक, मजदूर यूनियन, नाथूराम पुरोहित बालिका इंटर कॉलेज, नासिर पैलेस, चंदकुआ चौराहे पर, अनिल मोबाइल पर, बजाज एजेंसी पर, चौकी तिराहा, गांधीनगर में डॉ. हरिमोहन गुप्ता के पास, रोडवेज बस स्टैंड, आदित्य गैस एजेंसी, रेलवे क्रॉसिंग, एसआरपी स्कूल, ब्रजेश्वरी कॉलोनी, मारकंडेयश्वर तिराहा, मुंसिफी के सामने, एट मोड़ पर से लेकर हुल्का देवी मंदिर तक भंडारों का जाल सा बिछा था। 33 केबीए बिजलीघर पर बिजली विभाग द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया था।

 

अच्छी बुरी आत्माओं को दिया जाता है भोज्य

बड़ी पूजा पूरी तरह से तांत्रिक पूजा है और पूजा से पूर्व सभी देवी देवताओं और अन्य शक्तियों को आमंत्रित किया जाता है। आयोजन के दौरान मैया के डोला के आगे तीन लोग दुग्ध, मदिरा और शर्बत की तीन धारायें लाला हरदौल मंदिर से प्रारंभ होकर चार किमी दूर समापन स्थल हुल्का माता मंदिर तक अनवरत चलती रहती हैं जिसके पीछे मान्यता है कि रास्ते में जो भी अदृश्य शक्तियां मिलें वे अपने भोजनानुसार अपना भोज्य प्राप्त करते चलें।

मैया के रथ में जोते जाते हैं सुर्ख काले बकरे

हुल्का मैया की विदाई की शोभायात्रा में आगे आगे दो काले सुर्ख बकरे भी चलते रहते हैं। इन बकरों की उपयोगिता पूजा के लिहाज से महज इतनी है कि जब शोभायात्रा अपने गंतव्य पडऱी नाका स्थित हुल्का देवी मंदिर पर पहुंचती है तब मैया के रथ में ये दोनों बकरे जात कर रथ को खेतों की तरफ छोड़ दिया जाता है। इन बकरों की खासियत यह है कि ये सुर्ख काले ही होने चाहिये, ऐसे बकरे तलाशने में कई कई दिन आयोजकों को लग जाते हैं।

 

आकर्षण का केन्द्र रहे एक कुंतल के समोसे

कोंच के मारकंडेयश्वर तिराहे पर चैनू अग्रवाल के प्रतिष्ठान पर बड़ी पूजा के दृष्टिगत बनाये गये एक कुंतल के दो समोसे खासे आकर्षण का केन्द्र रहे। जानकारी के मुताबिक पेंसठ किलो का एक समोसा लंगर में बांटने के लिये बनाया गया था जबकि दूसरा पैंतीस किलो का समोसा मैया के भोग के लिये बनाया गया था। इन दोनों समोसों को बनाने में बारह घंटे का समय लगा।

 

मेला में खोये कीमती सामान तत्काल मिले

कोंच की इस बड़ी पूजा की खासियत यह है कि हर आदमी गलत करने के प्रति भयभीत रहता है कि कहीं मैया नाराज होकर कहीं कोई अनिष्टï न कर दें। शनिवार को मेला में कई महिलाओं के जेबर, लोगों के कीमती मोबाइल, वालेट आदि खोये लेकिन जिन्हें वह सामान मिलता, उसके द्वारा तत्काल ही उन्हें अनाउंसर तक पहुंचा दिया जाता रहा और वह सामान उसके मालिक तक पहुंचता रहा।

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