माधौगढ़उरई । पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की शोक सभा के बहाने वकीलों ने एसडीएम से खुन्नस निकालते हुए मंगलवार को तहसील में हंगामा किया था,जिसके बाद दोनों और से मामले ने तूल पकड़ लिया। वकीलों का आरोप था कि शोक सभा के बाद एसडीएम मनोज सागर ने कोर्ट किया। जिससे वकीलों में आक्रोश पैदा हो गया। लेकिन सही बात तो यह है कि कुछ वकील ही चाहते थे कि अदालती कार्यवाई न रोकी जाए। लेकिन कालीप्रसाद राठौर,राघवेंद्र व्यास, आदि वकीलों ने रौद्र रूप धारण करते हुए पहले बार भवन में एसडीएम के खिलाफ बैठक की,उसके बाद नारेबाजी करते हुए न्यायालय में घुस आए और डायस में तोड़फोड़ करने लगे। वकीलों की गुस्सा इतनी तीव्र थी कि उन्होंने एसडीएम के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए हंगामा किया।

जिस पर एसडीएम मनोज सागर ने पुलिस फोर्स को बुलवा लिया और पुलिस की मौजूदगी में दो दर्जन से ज्यादा वादों को सुना।जिसमे कुछ वकील खड़े भी हुए,कुछ ने बहिष्कार कर दिया। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और अधिवक्ताओं ने आज बैठक कर तहसील से संबंधित एक दर्जन से ज्यादा समस्याओं को उठाते हुए शिकायती पत्र भेजा,और पूरे दिन तहसील परिसर में अनशन किया।

 

एसडीएम का पैंतरा

एक ओर अधिवक्ता राई का पहाड़ बनाने में लगे हुए हैं तो वहीं एसडीएम मनोज सागर ने राजस्व परिषद के नियमानुसार 25-26 अक्टूबर के वादों के लिए संबंधित ग्रामों में ही सुनवाई का आदेश जारी करते हुए बताया कि उक्त दिनांक में जो वाद हैं उनको उसी ग्राम में पंचायत भवन पर 12 बजे   से सुना जाएगा। जिसके लिए संबंधित वादकारी समय से पंचायत भवन पर उपस्थित रहें।

 

वकीलों में बौखलाहट

एसडीएम के द्वारा गांव में ही सुनवाई के फैसले से जहां वादकारियों में खुशी तो वहीं वकीलों में गुस्सा। विवाद के दिन से ही वकीलों का पैंतरा फ्लॉफ हो गया है। पहले विरोध के वाद पुलिस की मौजूदगी में अदालत चलाना और अब ग्राम में ही वादों की सुनवाई करना वकीलों के खिसियाने के लिए पर्याप्त होगा। देखने बाली बात यह होगी कि कौन भारी पड़ता है?

 

 

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