(विजय द्विवेदी द्वारा )

 

उरई । बुंदेलखंड के प्रमुख तीर्थ स्थल पंचनद पर इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान के लिए एकत्र होने का अनुमान है जिसे देखते हुए प्रशासन सभी इंतज़ाम दुरुस्त करने में जुटा है । उपजिलाधिकारी माधौगढ़ ने समय रहते सड़क दुरुस्त कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है ।

जनपद जालौन के उत्तर पश्चिम में स्थित देश का एकमात्र पांच नदियों का संगम पंचनद बुंदेलखंड के प्रमुख तीर्थों में शुमार है । यहां वैसे तो बर्ष भर तीर्थ यात्रियों का भारी संख्या में आवागमन रहता है लेकिन प्रति वर्ष कार्तिक की पूर्णिमा पर बुंदेलखंड के अतिरिक्त इटावा, औरैया ,कानपुर देहात ,कन्नौज फर्रुखाबाद, भिंड ,मुरैना आदि अनेक जनपदों से लोग पुण्य स्नान के लिए उमड़ते हैं । संगम तट पर बने प्रसिद्ध संत श्री श्री मुकुंदवन जी महाराज जिन्हें लोग श्रद्धा से बाबा साहब महाराज कहते हैं,  के आश्रम में बने उनके मंदिर पर मान्यता के अनुसार पान बताशा का प्रसाद चढ़ाकर आशीर्वाद माँगा जाता है । इस वर्ष यह स्नान  23  नवंबर शुक्रवार को है  ।

पौराणिक  मान्यता है कि पंचनद में स्नान करने वाले को  अनेक रोगों से  मुक्ति के साथ   जन्म मृत्यु के बंधन से भी मुक्ति मिल जाती है । श्रीमद्देवी भागवत महापुराण के पंचम स्कंध के दूसरे अध्याय के श्लोक 18 से  22  के अनुसार  महिषासुर के पिता  रम्भ तथा चाचा करम्भ ने पुत्र प्राप्ति हेतु  पंचनद क्षेत्र में आकर तपस्या की थी । करम्भ ने पंचनद के पवित्र जल में बैठकर घोर तप किया तो रम्भ ने दुग्ध वाले वटवृक्ष के नीचे पंचाग्नि का सेवन कर तप किया । इंद्र ने मगरमच्छ का रूप धारण कर करम्भ को तपस्या करते हुए यहीं पंचनद पर मार डाला । स्कंद पुराण की कथा के अनुसार भृगुवंशी गुरु भार्गव महा अथर्वण का पंचनद तट पर भेड़ियों के कंज वन में आश्रम था ।  उनकी पुत्री का नाम वाटिका था । ऋषि महाअथर्वण महामृत्युंजय विद्या के जानकार थे । यमुना तट पर भ्रमण करते हुए श्रीकृष्ण द्वैपायन (व्यास जी ) महाराज को पंचनद में भेड़ियों ने घायल कर मरणासन्न कर दिया था तब  ऋषि पुत्री वाटिका के प्रयास से भार्गव महाअथर्वण ऋषि ने श्री कृष्ण द्वैपायन का उपचार कर प्राणदान दिया । बाद में वाटिका एवं व्यास जी का विवाह हुआ। इनसे सुखदेव जी महाराज की उत्पत्ति हुई । पंचनद तीर्थ का अनेक पुराणों में विभिन्न कथाओं के साथ वर्णन एवं उसका महात्म मिलता है । पंचनद का धार्मिक दृष्टि से जितना महत्व है उससे अलावा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति एवं सुंदरता आने वाले  भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है । प्राकृतिक सौंदर्यतो ऐसा  है कि  जो यहां एक बार आता है वह वाह – वाह करके पुनः सपरिवार आने की बात कहता है ।

साधु संतों का जमावड़ा

पंचनद संगम पर स्नान करने के लिए हजारों साधु संत पूर्णिमा के एक-दो दिन पहले ही अपना आसन जमाकर हरि कीर्तन एवं पूजा पाठ करते दिखेंगे जो पंचमी तक रहते हैं । बाद में सम्मान विदाई लेकर अपने आश्रमों को वापस चले जाते हैं ।

सात दिवसीय मेला

कार्तिक की पूर्णिमा के अवसर पर यहां 7 दिन का विशाल मेला लगता है जिसमें हजारों लोग बर्ष भर की आवश्यकताओं की वस्तुओं की खरीद-फरोख्त करते हैं । छोटे-बड़े अनेक झूले एवं मनोरंजन की अनेक साधन इस मेले के आकर्षण का केंद्र रहते हैं ।

भोजन व्यवस्था

यहां आने वाले साधु संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए आस पास के ग्रामों से बना बनाया भोजन प्रसाद आता है। इसे भंडारा कहते हैं । हर दिन शाम को मंदिर में  \भंडारा बनता है ।यहां प्रतिदिन हजारों लोग भंडारा ग्रहण करते हैं ।

पुलिस व्यवस्था

रामपुरा थाना क्षेत्र की सीमा में पंचनद पर विशाल मेला की व्यवस्था रामपुरा थाना पुलिस देखती है । जगम्मनपुर चौकी क्षेत्र में आने के कारण चौकी प्रभारी का विशेष उत्तरदायित्व होता है लेकिन जनपद के अनेक पुलिस थानों का फोर्स एवं पुलिस लाइन से भी पुलिस बल तथा पीएसी लगाकर कानून व्यवस्था चाक-चौबंद की जाती है। क्षेत्राधिकारी माधौगढ़, थानाध्यक्ष रामपुरा स्वयं विशेष निगरानी रखते हैं ।

 

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