
माधौगढ़-तहसील की समस्यायों और एसडीएम के भृष्टाचार का विरोध कर रहे वकीलों ने हड़ताल के साथ परिसर में एसडीएम का पुतला फूंक कर विरोध जताया। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस ने पहुंचकर आंदोलन कर रहे वकीलों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि बिना किसी सूचना के पुतला फूंकना कानूनन ठीक नहीं है। जिसके तहत कार्यवाही की जा सकती है।

विदित हो कि 23 अक्टूबर से बार संघ अध्यक्ष जितवार सिंह की अगुवाई में वकील एसडीएम मनोज सागर के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। वकीलों ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की शोकसभा के बाद एसडीएम ने कोर्ट किया और उनके रहते तहसील कई समस्यायों से घिरा है। हालांकि दो दिन बाद 26 वकीलों ने एसडीएम के पक्ष में होने का ज्ञापन दिया। जिसके बाद से आंदोलन कर रहे वकीलों का मनोवल टूटा। लेकिन आंदोलित वकील अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इसी के चलते आज जितवार सिंह,संजय सिंह,गोविंद सेंगर,मान सिंह, कप्तान सिंह पाल, श्याम सिंह सेंगर,राघवेन्द्र व्यास,प्रयाग नारायण द्विवेदी आदि वकीलों ने एसडीएम की गैरमौजूदगी में पुतला फूंका। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस ने वकीलों को समझाते हुए,कानून के दायरे में विरोध करने को कहा। कोतवाल रामसहाय ने कहा कि वकीलों ने विना किसी सूचना के पुतला फूंकने का विरोध किया जिसके लिए उनसे सख्त लहजे में कहा गया कि विना किसी पूर्व सूचना के ऐसा विरोध करने पर कार्यवाही की जा सकती है।
वकीलों के विरोध का सच आया सामने,सीनियर अधिवक्ता ने रिश्वत की पेशकश
जहां एक ओर अधिवक्ता एसडीएम मनोज सागर के खिलाफ भृष्टाचार का आंदोलन,हड़ताल और पुतला फूंकने जैसा विरोध जता रहे हैं,वहीं पूरे विरोध का सच सीनियर अधिवक्ता की फ़ोन रिकॉर्डिंग से बाहर आ गया है। तहसील के सीनियर अधिवक्ता कालीप्रसाद राठौर और बार संघ अध्यक्ष जितवार सिंह एसडीएम का विरोध कर रहे हैं। जिसके पीछे की वजह सीनियर अधिवक्ता के खिलाफ न्यायिक आदेश होना है। एक मुकद्दमें के सिलसिले में सीनियर अधिवक्ता कालीप्रसाद राठौर फ़ोन पर रिश्वत की पेशकश करते हुए जिताने की बात कह रहे हैं।जबकि दूसरी तरफ से कहा जा रहा है कि फ़ाइल जो बोलेगी,फैंसला वही होगा। जिसके बाद फैंसला पक्ष में न होने से सीनियर अधिवक्ता भड़क गए और शोकसभा के बाद कोर्ट करने का बहाना लेकर मुखर हो गए। जबकि मुकद्दमें के ही सिलसिले में वह एसडीएम से भी फ़ोन पर फैंसला पक्ष में न होने पर नाराजगी जता रहे हैं। इन्ही फ़ोन रिकॉर्डिंग को आधार बनाकर सीनियर अधिवक्ता एसडीएम के भृष्टाचार को साबित करने में लगे हुए हैं जबकि हकीकत में खुद सीनियर अधिवक्ता रिश्वत की पेशकश करते हुए मामले को अपने पक्ष में कराना चाहते थे।




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