
मुंबई । भवन्स कल्चरल सेंटर अंधेरी वेस्ट द्वारा सरोकार रंगकर्मी मुंबई के सहयोग से सरदार पटेल सभागार में आयोजित समारोह में आज अनुकृति रंगमंडल कानपुर ने अपनी दूसरी नाट्य प्रस्तुति पुरुष का शानदार मंचन किया।

जयवंत दलवी के इस मराठी नाटक का हिन्दी रुपांतरण सुधाकर करकरे और निर्देशन निशा वर्मा ने किया।
नाटक पुरुष की शुरूआत होती है अण्णा साहब आप्टे के घर से जो एक आदर्श शिक्षक हैं। उनकी अपनी पत्नी तारा के साथ कुछ वैचारिक मतभेद होते हैं, लेकिन वह हमेशा उनका साथ भी देती है। अण्णा की बेटी अंबिका एक स्कूल में पढ़ाती है। उसका एक दोस्त है सिद्धार्थ, जो दलितों के हक की लड़ाई लड़ता है। तभी नाटक में प्रवेश होता है बाहुबली नेता गुलाबराय जाधव का, जिसके काले-कारनामों को अंबिका कई बार उजागर कर चुकी है। गुलाबराय अंबिका से बदला लेने के लिए उसको धोखे से डाक बंगले में बुलाकर बलात्कार कर देता है। अंबिका को सामाजिक प्रताड़ना तो सहनी ही पड़ती है, अदालत से भी न्याय नहीं मिलता। सदमे से क्षुब्ध अंबिका की मां तारा आत्महत्या कर लेती है। मुश्किल घड़ी में सिद्धार्थ भी साथ छोड़ देता है। अब अंबिका को अपनी लड़ाई अकेले लड़नी है और वह गुलाबराव को जीवन भर याद रखने वाला सबक सिखाती है। नाटक के अंतिम दृश्य में अंबिका पुलिस को कॉल करती है। इंस्पेक्टर गॉडगिल पूछते हैं ‘क्या तुमने गुलाबराव को मार डाला। अंबिका कहती है नहीं, मैंने उसका पुरुषत्व हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर डाला।’ इसी के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है।

नाटक में महेंद्र धुरिया, राजीव तिवारी, जोली घोष, विजयभान सिंह, आनामिका जायसवाल, दीपिका सिंह, स्वयं, शुभी मेहरोत्रा, संजय शर्मा, सम्राट यादव व विजय भास्कर ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई। प्रस्तुति नियंत्रक व सहायक निर्देशक डा. ओमेंद्र कुमार व सलाहकार निर्देशक कृष्णा सक्सेना थे।आर एस विकल जी, शशि सोहन शर्मा जी को सम्मानित किया गया। फिल्मकार/ नाट्य निर्देशक
रमन कुमार, संगीतकार कुलदीप सिंह मौजूद रहे।




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