उरई । जनपद के गौरव रामपुरा क्षेत्र के एतिहासिक और धार्मिक महत्व के कार्तिक पूर्णिमा मेले के अस्तित्व में तीर के किसानों और बिजली विभाग का रवैया ग्रहण साबित हो रहा है ।

प्रतिवर्ष कार्तिक की पूर्णिमा पर  जगम्मनपुर के पास पाँच नदियों के संगम के किनारे सात दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है । लाखों श्रद्धालु पंचनत संगम में स्नान कर स्थानीय मंदिरों पर पूजा अर्चना करते हैं । उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस धार्मिक स्थल को पर्यटन क्षेत्र घोषित कर यहां के विकास के लिए करोड़ों रुपया स्वीकृत कर दिए हैं । विकास कार्य हेतु कार्य योजना भी तैयार हो गई है । पंचनद क्षेत्र के विकास के लिए जागरूक लोग सदैव तत्पर रहते हैं । वे एक समिति बनाकर मंदिर तथा मेले का प्रबंधन भी करते हैं किंतु दुर्भाग्य का आलम यह है कि  जहां यह धार्मिक स्थल है वहां के कुछ स्थानीय निवासी इसके विकास में समय-समय पर बाधाएं उत्पन्न करते रहते हैं । ।

ज्ञात हो कि पंचनद पर स्थित श्री बाबा साहब मंदिर के आसपास जो कृषि भूमि है उसके पट्टे रियासत के समय जगम्मनपुर राज्य द्वारा स्थानीय कृषकों को इस शर्त पर दिए गए थे कि जब यहां मेला लगाने का समय हो उन दिनों के लिए किसानों को अपने खेत खाली करना पड़ेंगे और यह परंपरा तब तक कायम  रही जब तक पुराने व संस्कारयुक्त मंदिर में आस्था रखने वाले लोग जीवित रहे किंतु अब पुराने लोग जीवित नहीं रहे अथवा वह प्रभावहीन हो गए हैं । उनकी आधुनिक संताने जिन्हें न तो पंचनद तीर्थ के गौरव से कोई वास्ता है न उन्हें अपने पूर्वजों की परंपरा की कोई फिक्र है। वह केवल कानून की बात जानते हैं , कानून की भाषा बोलते हैं । मेला के अवसर पर ये लोग अपने कब्जे वाले खेतों को मेला में आने वाली दुकानों अथवा साइकिल , मोटरसाइकिल स्टैंड के लिए खाली करने में बड़ी हील हुज्जत करते हैं । एक किसान लखन पुत्र रबूदे तो मेला की व्यवस्था में जानबूझकर अवरोध पैदा करने के लिए अपने मेला के 15 – 20 दिन पहले सब्जी की फसल तैयार कर देता है और खेत खाली करने की कहने पर झगड़ा करने का आमादा हो जाता है । इसी किसान की देखा देखी अन्य किसान भी अपने खेत में सब्जी की फसल खड़ी करके खेत खाली करने में परेशानी उत्पन्न करते हैं जबकि यह मंदिर और यह मेला कंजौसा के किसानों एवं यहां के निवासियों का गौरव है । यदि कानूनी ढंग से कार्य हो तो इन सभी किसानों को मेला के अवसर पर अपना खेत खाली करना पड़ेगा ,  ऐसा न करने पर उनके पट्टों के निरस्तीकरण की कार्यवाही अमल में लाई जा सकती है ।

 

विद्युत विभाग की लापरवाही

 

विद्युत विभाग का आलम यह है मेला परिसर में 11 हजार हाईटेंशन लाइन के कई तार निकले हैं जो काफी नीचे एवं खतरनाक भी हैं । गत बर्ष सामान लोडर से उतारते समय रात के अंधेरे में हाईटेंशन बिजली के तार से पाइप छू जाने से इटावा के एक झूला संचालक की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद  पूरे मेला क्षेत्र में लगभग 10 दिन तक ग्राम कन्जौसा की विद्युत सप्लाई बंद रखी गई थी जो अव्यावहारिक कदम था । इस गांव के प्रत्येक घर में मेला के दिनों रिश्तेदारों का जमावड़ा रहता है । मंदिर पर भी साधु संत एवं लाखों श्रद्धालुओं का मेला लगता है इस अवसर पर विद्युत सप्लाई ठप करने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी । यदि मेला परिसर से गुजरने वाले खुले तारों के स्थान पर केबिल डाल दी जाए तो समस्या का सरल समाधान हो सकता है । इससे करंट लगने का खतरा भी नहीं रहेगा और विद्युत सप्लाई भी निर्बाध रूप से जारी बनी रहेगी ।

उक्त संदर्भ में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष हरगोविंद सिंह सेंगर, भाजपा नेता विजय द्विवेदी , बीरसिंह यादव ग्राम प्रधान , बृजेश प्रजापति सदस्य जिला पंचायत , राहुल मिश्रा प्रधान जगम्मनपुर , ताहर सिंह यादव अध्यक्ष सहकारी समिति जगम्मनपुर आदि ने जिलाधिकारी जालौन तथा उपजिलाधिकारी माधौगढ से मांग की है कि  जनपद के प्रसिद्ध मेला के गौरव की रक्षा हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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