
कोंच-उरई । 7 नवंबर की शाम लगभग पांच बजे कस्बे के बाहरी इलाके धनुताल इलाके के दशहरा मेला मैदान में लगी आतिशबाजी की दुकानों में अचानक ही आग भड़क गई जिसमें आधा दर्जन दुकानें जल कर खाक हो गईं थीं। दुकानों से उड़े रॉकेटों ने सड़क के दूसरी तरफ बने घरों में गिर कर तबाही मचाई और दो घर राख में तब्दील हो गये थे, गनीमत यह रही कि जनहानि बच गई। इतनी बड़ी घटना घट गई लेकिन इसके पीछे जिम्मेदार कौन है यह अभी तक निकल कर सामने नहीं आ सका है। प्रशासन और पुलिस की तरफ से न तो किसी तरह की जांच ही हुई और न ही इस हादसे के लिये किसी की जिम्मेदारी फिक्स की गई है।
हालांकि इस हादसे को लेकर अंदेशे तो पहले से ही लोगों के जेहन में थे क्योंकि जो दुकानें लगाई गईं थी उनमें सुरक्षा मानकों की बुरी तरह अनदेखी की गई थी। अव्व्ल तो दुकानों के बीच कम फासला और आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने के नाकाफी उपायों ने हादसे पर काबू पाने में अड़ंगा डाला। फायर सर्विस की गाड़ी तो वहां सफेद हाथी की तरह खड़ी थी लेकिन कर्मी नदारत थे जिसके कारण समय से रेस्क्यू नहीं किया जा सका। आसपास के लोगों ने हैंडपंपों और नाले के पानी से आग बुझाने के प्रयास किये। सुरक्षा मानकों को लेकर खबरें भी अखबारों में प्रकाशित की गईं थीं लेकिन शायद इन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। अगर समय रहते इन मानकों पर ध्यान दिया गया होता तो संभवत: इतना बड़ा हादसा नहीं हो पाता। गौरतलब यह भी है कि पहले ये दुकानें सागर तालाब के मैदान में लगती थी लेकिन वहां आबादी के बीच होने के कारण इन्हें धनुताल के मैदान में स्थानांतरित किया गया था। प्रशासन की इसमें भी चूक है, जहां ये दुकानें लगाई गई थीं वहां भी काफी आबादी है और ज्यादातर घर कच्चे हैं, बच्चों के स्कूल, विवाहघर के अलावा रिहायशी मकान भी वहां हैं, लिहाजा दो घर गंगाप्रसाद और हरप्रसाद कुशवाहा के तथा लगभग आधा दर्जन बाइकें भी हादसे की चपेट में आ ही गये। कोतवाल संजयकुमार गुप्ता का कहना है कि इस घटना को लेकर उनके पास अभी तक कोई तहरीर नहीं आई है, अगर कोई तहरीर देता है तो मुकदमा जरूर लिखा जायेगा। उन्होंने बताया कि पांच बाइकें और एक स्कूटी इस अग्निकांड में जले हैं लेकिन ये वाहन किसके हैं इसकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी है और न ही कोई क्लेम करने अभी तक आया है।
दरोगा सुरेन्द्रसिंह का रहा सराहनीय प्रयास
जब आतिशबाजी की दुकानों में आग लगी और बमों तथा पटाखों के विस्फोट हो रहे थे तब न केवल स्थानीय लोग बल्कि दुकानदार भी मैदान छोड़ कर भाग खड़े हुये। ऐसे में जांबाज दरोगा सुरेन्द्रसिंह की हिम्म्त देखने लायक थी। वे अकेले ही उन दुकानों का सामान हटाने में पिल पड़े जिन तक आग नहीं पहुंची थी। उन्होंने बाकई जांबाजी दिखाते हुये कम से कम चार दुकानें आगजनी की भेंट चढने से बचा लीं। लोग उनकी कर्तव्यपरायणता की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।
प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सुरक्षा के मानक देखे
धनुताल इलाके में संचालित न्यू कुशवाहा विवाहघर के संचालक वीरसिंह कुशवाहा का कहना है कि जिस इलाके में अभी दुकानें लगाई गईं थीं वह इलाका भी आबादी क्षेत्र से सटा हुआ ही है और प्रशासन को सुरक्षा के पर्याप्त उपाय करने चाहिये थे जो नहीं किये गये और इतना बड़ा हादसा हो गया। उन्होंने कहा है कि इस घटना के बाद से इलाकाई लोगों में भय और गुस्सा दोनों हैं, वे अब अगले साल शायद ही यहां दुकानें लगने दें।
इलाकाई लोग मदद में न आये होते तो बड़ा हादसा होता
जहां आतिशबाजी की दुकानें जली वहां से थोड़ी दूरी पर रखी कन्फेक्शनरी की छोटी सी दुकान के संचालक अशोककुमार के बगल बाली दुकान और घर आग की चपेट में आ कर खाक हुये हैं। अशोक का कहना है कि अगर घटना के बाद केवल प्रशासन के भरोसे रहते तो नुकसान का आंकड़ा ज्यादा बड़ा होता। घटना के तत्काल बाद इलाके के लोग दौड़ पड़े और अपने अपने संसाधनों से आग पर काबू पाने में जुट गये जिसके चलते नुकसान कम हो सका।






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