
कोंच-उरई । जिलाधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर ने अन्ना मवेशियों की विकट समस्या को लेकर किसानों, ग्रामीणों, प्रधानों और इलाके के जिम्मेदार लोगों के साथ चर्चा करते हुये कहा कि किसी भी समस्या का समाधान तब तक संभव नहीं हो सकता जब तक कि उसमें आम जन की सहभागिता न हो। अन्ना मवेशियों की समस्या केवल किसानों की समस्या नहीं है बल्कि इससे आम जन जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और कभी कभी यह कानून और व्यवस्था को भी प्रभावित करने लगती है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मवेशी हैं वे उन्हें अपने घरों में बांधें और इसके बाद जो दस पांच फीसदी जानवर रह जायेंगे उनके प्रबंधन के लिये ग्राम सभा, ग्रामीण और प्रशासन मिल कर प्रयास करेंगे।

न केवल जिले की अपितु बुंदेलखंड की विकराल समस्या बन कर आम जन जीवन को अस्त व्यस्त करने में लगी अन्ना जानवरों की समस्या से कैसे निजात मिले और किस तरह से उनका प्रबंधन किया जा सकता है, को लेकर एक वृहद् गोष्ठी का आयोजन गल्ला मंडी में किया गया जिसकी अध्यक्षता डीएम डॉ. मन्नान अख्तर ने की एवं मुख्य अतिथि एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी रहे। डीएम ने कहा कि शासन भी इस समस्या को लेकर चिंतित है और प्रशासन के स्तर से भी तमाम प्रयास किये जा रहे हैं जिनमें बंध्याकरण से लेकर नस्ल बदलने तक की योजनायें शामिल हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि साठ फीसदी गायें ऐसी हैं जो किसानों ने अनुपयोगी समझ कर छोड़ रखीं हैं। किसान उन्हें खूंटे से बांधें, जो लोग ऐसा नहीं करेंगे उनको नोटिस दिये जायेंगे और यदि फिर भी उनकी समझ में बात नहीं आई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का विकल्प खुला है। उन्होंने गांवों में ऐसी समितियां बनाने पर जोर दिया जिनमें किसान, ग्राम प्रधान और अन्य जिम्मेदार लोगों की भागीदारी हो और वे आवारा पशुओं के पूनर्वास और प्रबंधन की दिशा में प्रशासन का सहयोग लेते हुये सार्थक पहल कर सकें। जिले के पुलिस कप्तान डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि अन्न मवेशी कानून और व्यवस्था के लिये भी बड़ी समस्या बन कर सामने आ रहे हैं लिहाजा इस प्रथा को राके जाने के लिये जरूरी कदम उठाया जाना आवश्यक है और यह काम बिना जन सहयोग के सफल हो पाना नामुमकिन है। उन्होंने अपने आसपास घटित होने बाले अपराधों पर भी जनता का ध्यान खींचा, कहा कि इस बाबत प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को जरूर अवगत करायें ताकि उन्हें रोकने के लिये कारगर कदम उठाये जा सकें। एसडीएम गुलाब सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी सिंह गौर, उप निदेशक कृषि आरके तिवारी, प्रधान संघ के राष्टï्रीय उपाध्यक्ष आमोदकुमार उदैनिया, पूर्व जिपं उपाध्यक्ष बलराम तिवारी, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशीय पदाधिकारी डॉ. केदारनाथ सिमिरिया, तहसील अध्यक्ष चतुरसिंह, एसओ नदीगांव शिवगोपाल वर्मा, मंडी चौकी इंचार्ज राजीवकांत आपने बहुमूल्य सुझाव दिये। संचालन राजेन्द्र दुवे ने किया। इस दौरान तहसीलदार भूपाल सिंह, नायब तहसीलदार राकेश राजपूत, मंडी सचिव डॉ. दिलीपकुमार वर्मा, बीडीओ कोंच सत्तीदीन, कोतवाल कोंच संजयकुमार गुप्ता, एसआई सुरेन्द्रकुमार सिंह, एसआई दामोदर सिंह, गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय गोयल, मैंथा थोक व्यापारी कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय रावत, जमींपाल सिंह गुर्जर, सभासद महावीर यादव, अमित यादव, विशाल गिरवासिया, बालकृष्ण वर्मा, छोटू टाइगर, पुष्पेन्द्र सरोनिया, अरविंद खटिक, बादामसिंह कुशवाहा, रविकांत कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
गोष्ठी में एसओ नदीगांव की पीठ थपथपा गये कप्तान
शनिवार को गल्ला मंडी में अन्ना मवेशियों के प्रबंधन को लेकर आहूत गोष्ठी में एसओ नदीगांव शिवगोपाल वर्मा के न केवल इसी मुद्दे पर बल्कि अन्य सामाजिक सरोकारों को लेकर किये गये सार्थक प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की गई। पुलिस कप्तान डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह से नदीगांव इंसपेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर गांव गांव पंचायतें करके ग्रामीणों और किसानों को अपने अपने पशुओं को घरों में बांधने के लिये प्रेरित किया उसके सार्थक परिणाम भी सामने आये और लोगों ने अपने जानवरों को अपने घरों में बांधना शुरू किया है जिससे उनके थाना क्षेत्र में इस समस्या में साठ से सत्तर फीसदी तक कमी आई है। अन्य लोगों को भी उनके कामों से सीख लेनी चाहिये। गोष्ठी में उन्हें चाह छह लोग हेलमेट लिये दिखे तो कप्तान ने उन्हें भी शाबाशी दी और आम लोगों से हेलमेट पहन कर चलने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हेलमेट मजबूरी नहीं, जरूरी है।







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