
कोंच-उरई। पिछले छह माह से गल्ला मंडी में सभी कैंटीनें पूरी तरह से बंद पड़ी हैं जिसके चलते किसानों और व्यापारियों को चाय तक के लाले पड़े हैं। इसके अलावा मंडी को भी राजस्व का घाटा हो रहा है। इन कैंटीनों के बंद पड़े होने का कारण लंबी प्रीमियम राशि मांगा जाना बताया गया है।
कोंच गल्ला मंडी ए श्रेणी की मंडी है और यहां ई-टे्रडिंग के तहत व्यापार होता है। जिले की सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित करने बाली मंडियों में भी ये शुमार होती है। इस मंडी परिसर में विभिन्न प्वाइंट्स पर नौ कैंटीनें बनी हुई हैं लेकिन पिछले लगभग छह माह से सभी कैंटीनें बंद पड़ी हैं जिसके कारण किसानों और व्यापारियों को चाय तक के लिये तरसना पड़ता है। मंडी परिषद् की यह जिम्मेदारी भी है कि मंडी आने बाले किसानों के लिये सभी तरह की सुविधायें उपलब्ध कराई जायें लेकिन और सुविधाओं की कौन कहे, चाय तक उन्हें मयस्सर नहीं हो पा रही है। इनके बंद पड़े होने से मंडी को भी राजस्व की हानि हो रही है सो अलग। कई बार इनका ऑक्शन कराने का प्रयास भी मंडी प्रशासन द्वारा किया गया है कि उन्हें लेने बाला कोई नहीं है। इसका भी बड़ा कारण है, हर कैंटीन के प्रीमियम के लिये एक लाख की राशि निर्धारित की गई है। इतनी बड़ी राशि प्रीमियम के तौर पर देने की हैसियत उन लोगों की नहीं है जो इन्हें चलाने में दिलचस्पी रखते हैं। बताया यह भी गया है कि पहले इन कैटीनों की बोली तीन साल के लिये लगती रही है और बतौर प्रीमियम भी कम राशि जमा करनी पड़ती थी, लेकिन अब नये प्रावधान के मुताबिक कैंटीन सिर्फ ग्यारह महीने के लिये उठाई जानी है। ऐसे में इन कैंटीनों को लेने में किसी की दिलचस्पी नहीं रह गई है और इनमें कबूतरों ने अपने बसेरे बना लिये हैं। मैंथा गल्ला थोक व्यापारी कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय रावत ने मंडी परिषद् के उच्चाधिकारियों को पत्र लिख कर प्रीमियम राशि कम करके बोली लगवाने की मांग की है।
इंसेट में-
फोटो-कोंच7-मंडी सचिव डॉ. दिलीप वर्मा
डीडीए के मार्फत शासन को लिखा गया है-मंडी सचिव
कोंच। कैंटीनें बंद पड़ी होने को लेकर मंडी सचिव डॉ. दिलीप वर्मा से जब पूछा गया तो उन्होंने माना कि हां, प्रीमियम राशि ज्यादा होने के कारण लोग इन कैंटीनों को लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इनके बंद होने के कारण राजस्व की हानि भी हो रही है। उन्होंने बताया है कि चूंकि यह नीतिगत फैसला ऊपर से ही लिया गया है इसलिये उनके स्तर से प्रीमियम राशि कम नहीं की जा सकती है लेकिन उन्होंने डीडीए को पत्र भेज कर शासन तक यह बात पहुंचा दी है। जैसा ऊपर से आदेश होगा उसी अनुरूप कार्य किया जायेगा।
इंसेट में-
हरी मटर की भी बड़ी मंडी है कोंच
कोंच। कोंच गल्ला मंडी दलहन और तिलहन की बड़ी मंडी होने के साथ साथ हरी मटर की भी बहुत ही बड़ी मंडी है। एकाध हफ्ते में हरी मटर की आवक भी शुरू होने बाली है जिसके चलते प्रतिदिन हजारों किसानों की यहां आमदरफ्त होगी और दिन रात मंडी में भीड़भाड़ रहेगी। कोंच से सैकड़ों ट्रक रोजाना मटर की लदान होती है जो देश की बड़े महानगरों को जाती है। ऐसे में कैंटीनें नहीं होने के कारण किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। किसानों की सुविधा को देखते हुये इन कैंटीनों का शुरू होना जरूरी माना जा रहा है।







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