उरई । जालौन जिले के लोग पड़ोस में होने के कारण मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव के परिणामों पर टकटकी लगाये हुए थे लेकिन जिले में सबसे ज्यादा लोगों की निगाह धरतीपुत्र डॉ गोविंद सिंह की वजह से लहार सीट पर थी । भाजपा ने उनको हराने के लिए सारे संसाधन झोंक डाले थे लेकिन नतीजे नहीं बदल सके । सातवीं बार गोविंद सिंह ने चुनावी मैदान जीत कर अपनी अपराजेय छवि को बरकरार रखा ।

डॉ गोविंद सिंह ने एक पत्रकार के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी और इस मामले में जालौन जिले के लोगों को सच्चे मायनों में जननेता कहलाने के हकदार गोविंद सिंह पर इसलिये नाज़ है कि पत्रकार के रूप में उरई से प्रकाशित दैनिक कर्मयुग प्रकाश से उन्होने ब्रेक किया था । इस दौरान उन्होने लोगों के बीच सेवा और संघर्षशीलता का उदाहरण बन कर ऐसी पैठ बनाई कि वे जब लहार नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए ज़ोर आजमायश करने उतरे तो सहज ही जीत गए । इसके बाद उन्होने पीछे मुड़ कर नहीं देखा ।

प्रारंभ में वे जनता दल में थे । बहुत कम लोगों को पता है कि एक समय जार्ज फर्नांडीज़ और शरद यादव  जैसे बड़े नामों के लिए अपनी पहचान बनाये रखने का सबसे बड़ा ठिकाना गोविंद सिंह के कारण भिंड बन गया था । गोविंद सिंह अपनी दम के नेता हैं जिन्हे उदाहरण माना जा सकता है । उन्हे हराने के लिए भाजपा ने इस बार जबरदस्त घेराबंदी की थी जिसके तहत बाहुबली होने के कारण उम्रदराज होने के वाबजूद रसाल सिंह को उम्मीदवार बनाया गया । उमा भारती और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ले कर भाजपा के हर बड़े नेता ने लहार में सभा की, गोलियां भी चलाई गयीं जिसमें उनका भतीजा बाल –बाल बचा  लेकिन अंततोगत्वा उनका किला नहीं भेदा जा सका । गोविंद सिंह भोर तक चली मतगणना  पूरी होने के बाद रसाल सिंह को 7724 मतों से हराने में कामयाब रहे ।

गोविंद सिंह को 58753, रसाल सिंह को 51029 और बसपा प्रत्याशी गुड्डू शर्मा को 29831 मत मिले ।

गोविंदसिंह की जीत के ऐलान के बाद जालौन जिले में भी भारी जश्न मनाया गया । अशोक सेंगर के आवास पर आतिशबाजी दाग कर मिठाइयाँ बांटी गयी जिसमें प्रख्यात दलित नेता रामधीन , वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक दुबे और इंजीनियर डी के सिंह परिहार खासतौर पर मौजूद रहे ।

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