बचपन कच्चे मिट्टी की तरह उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है: पं. सुदामा तिवारी

  जालौन। बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो इसके लिए श्रीमद्भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। यह बात नगर के एकमात्र सरस्वती मंदिर पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन भागवताचार्य पं. सुदामा तिवारी ने उपस्थित श्रोताओं के समक्ष कही।नगर के एकमात्र सरस्वती मंदिर पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन भागवताचार्य पं. सुदामा तिवारी ने श्रोताओं को सती चरित्र के प्रसंग की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उत्तानपाद के वंश में ध्रुव हुए हैं। ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो इसके लिए श्रीमद्भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। बताया कि भगवान नृसिंह रूप में लोहे के खंभे को फाडक़र प्रगट होना बताता है कि प्रहलाद को विश्वास था कि उनके भगवान उस लोहे के खंभे में भी हैं और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रहलाद के प्राणों की रक्षा की। इस मौके पर पारीक्षित राजेंद्र दूरवार, पुष्पा देवी, पुजारी हृदेश मिश्रा, मुन्ना सेंगर, बड़े सोनी, वीरेंदए्र प्रजापति, मुन्नाराजा गुर्जर, अभिषेक माहेश्वरी, अंजू मिश्रा, देवी सिंह, छोटे सोनी, अनिल तिवारी, बाबूजी गुर्जर, रिंकू गुप्ता, रामपाल सिंह, श्रीकांत दीक्षित, रामदास, बृजकिशोर सोनी, डा. एल. प्रसाद पाल, रितिक चेला आदि मौजूद रहे।

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