उरई। पडोसी झांसी जनपद के गरौठा तहसील की अतरसुआं गांव की रहने वाली प्रियंका निरंजन अब जालौन जिले की नई जिलाधिकारी बन गयी है। उनकी आरम्भिक पढाई उरई और झांसी हुयी है। पिता लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार है जबकि मां गृहिणी है।
फैमिली बैकग्राउण्ड
वैसे अतरसुआं उनके पिता की जन्म भूमि है। उनका जन्म तो लखनऊ में 1 अक्टूबर 1984 को हुआ था । उनकी दो बहिनें और एक छोटा भाई है। एक बहिन ने बीटेक किया है और दूसरी बहिन ने एमएससी। प्रियंका ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री और यही से अर्थशास्त्र में एमए किया।
20वीं रैंक पर आईएएस सिलेक्ट किया
प्रियंका ने सिविल परीक्षा की तैयारी 2008 से शुरू की थी। लेकिन वे छठें प्रयास में आईएएस में सिलेक्ट हो पायी। 2013 में उन्हें आईएएस में 20वीं रैंक मिली। उनकी पहली पोस्टिंग मुजफ्फर नगर में ज्वाइन्ट मजिस्टेªट के पद पर हुयी। यहां उनको पहली सन्तान हुयी जिसके लिये राजकीय अस्पताल में डिलेवरी कराकर उन्होने एक मिशाल कायम की । प्रियंका निरंजन के पति मनीष सिंह आईपीएस है। प्रियंका 2मई 2017 तक मुजफ्फरनगर में तैनात रही ।
मिर्जापुर में मिसाल बनाने के लिये बच्चों के साथ खाया मिडडेमील
इसके बाद पदोन्नति होकर वे मिर्जापुर में मुख्य विकास अधिकारी बन गयी । इस दौरान एक सरकारी स्कूल में बच्चों के साथ मिडडेमील खाकर उन्होने मिशाल कायम की । प्रियंका निरंजन बच्चों के साथ तब उठी जब सभी बच्चों ने भोजन कर लिया था। भोजन के बाद प्रियंका निरंजन बच्चों के साथ हैण्डवाॅश के लिये नल के पास पहुंची और बच्चों को स्वच्छता अभियान तहत हाथ धुलने से होने वाले फायदे और तरीके समझाये। 3जून 1920 को वे सिचाई और जल संशाधन विभाग में विशेष सचिव नियुक्त हुयी। इसके बाद अब उन्हंे जालौन जिले के जिलाधिकारी की बागडोर सौप दी गयी है।
कई दुर्लभ नजीरे कायम करके रवाना हुये मन्नान
प्रियंका निरंजन ने निवर्तमान जिलाधिकारी डा0 मन्नान अख्तर की जगह ली है।
डा0 मन्नान अख्तर 3 साल 5 माह 2 दिन तक जालौन के जिलाधिकारी रहे। उन्होने जिले में सबसे लम्बे समय तक जिलाधिकारी रहने का रिकार्ड बनाया है। अब उनको शासन ने चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग में विशेष सचिव नियुक्त किया है। कालपी में धर्म स्थलो के आडे आने के कारण कई वर्षो से अटके फोरलेन को उन्होने बहुत सूझबूझ से पूरा करा दिया । इसमें विकास के लिये धार्मिक स्थलों को शिफ्ट किये जाने की एक नई नजीर उन्होने बनायी जो पूरे प्रदेश में दुर्लभ है। इसी तरह जालौन औरेया रोड के निर्माण में भी उन्होने एक पूजा स्थल को सभी की सहमति से शिफ्ट करा दिया । इन कार्यो के लिये उन्हें लम्बे समय तक याद रक्खा जायेगा।








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