कालपी। नगर के राजेपुरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के व्यास आचार्य राजेश द्विवेदी ने श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भक्तएवं महत्ता तथा राम तथा कृष्ण जन्म की कथाओं को विभिन्न प्रेरक प्रसंगों के तहत समझाते हुए कहा कि नाम का प्रभाव अनादि काल से प्रभावशील रहा है। भक्तों ने जब जब भगवान को सच्चे हृदय से पुकारा तब तब वह उनके सहायक बने। भक्तजन सच्चे मन से भगवान का स्मरण करें तो निश्चित कल्याण होगा।नगर के मोहल्ला राजेपुरा में स्थित नागेश्वर मंदिर मां संकटा देवी प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के परीक्षित मुन्नालाल गुप्ता नुमाइश वाले व उनकी धर्मपत्नी के माध्यम से कथा व्यास आचार्य राजेश द्विवेदी ने भक्तजनों को कथा सुनाते हुए कहा कि भक्त दो प्रकार के होते हैं। भक्त ध्रुव व प्रहलाद के चरित्र से प्रेरणा लेकर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। भक्तों में प्रहलाद का नाम प्रथम पंक्ति में माना गया है। भक्तमाल कथा  में इका प्रमाण है। कुंती, द्रौपदी, अजामिल, सुदामा, सबरी, प्रहलाद आदि का उद्धार एवं मर्यादा का रक्षण नाम के प्रभाव से ही हुआ है। रामनाम संकीर्तन अथवा जाप किसी भी तरह अवश्य करना चाहिए। ईश्वर नाम के स्मरण में वह शक्ति है जो किसी में नहीं है। नाम के प्रभाव से नल नील के द्वारा डाले गए पत्थरों से जब सेतु का निर्माण हो सकता है तो सच्चे हृदय से पुकारने वाले भक्तों का क्यों नहीं। श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने के सही मार्ग पर ले जाती है। प्रत्येक माता पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं। भगवान राम ने जो किया तथा भगवान कृष्ण ने जो कहा उनका अनुसरण कराकर संतानों को संस्कारपरक शिक्षा दिलाएं। अंत में कथा व्यास ने कहा कि जब जब पृथ्वी पर अनाचार अत्याचार बढ़ता है तब तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाकर भक्तों को भाव विभोर किया। प्रसंग के दौरान काफी संख्या में महिलाएं व भक्तजन मौजूद रहे।

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