कोंच-उरई । भाजपा से जले भुने बैठे पढ़े-लिखे बेरोजगारों की उम्मीद अब समाजवादी पार्टी पर आकर टिक गई है। जिस तरह से सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और बेरोजगारों को नौकरी देने का भरोसा अपने चुनावी घोषणापत्र में दिया है उससे इन युवाओं में अपने भविष्य को लेकर एक आस जगी है। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के कोंच प्रवास के दौरान ऐसे सैंकड़ों पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा उनकी सभा में पहुंचे और एक अलग दीर्घा में सिर पर सफेद टोपी पहने बैनर और तख्तियां लेकर सपा की जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सपा अध्यक्ष का ध्यानाकर्षण करते देखे गए। बाद में उन्होंने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी सपा अध्यक्ष को दिया।

बुंदेलखंड में एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है ‘थरिया हिरा जाए तौ ढूंढवे के लानें लोग गगरी में हाथ डारत’। इसका आशय बिल्कुल साफ है कि थाली गगरी के भीतर होना बिल्कुल ही असंभव है लेकिन उम्मीद बड़ी चीज होती है। कुछ ऐसा ही आसन्न विधानसभा चुनाव में देखने को मिल रहा है। सपा ने युवाओं और बेरोजगारों की नब्ज अच्छे से भांप कर तुरुप चाल चल दी है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल होगी और बेरोजगारों को नौकरी देने के लिए भर्तियां खोली जाएंगी। सपा के इस चुनाव मैनीफेस्टो को विरोधी दल भले ही चुनावी स्टंट बता रहे हों लेकिन इन शिक्षित बेरोजगारों ने अपने भविष्य के लिए इसे संजीवनी मान लिया है और सपा के समर्थन में इस चुनावी दंगल में कूद पड़े हैं। बीएड टेट 2011 अचयनित एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल को कोंच प्रवास के दौरान ज्ञापन देकर उन्हें लंबित पड़ी शिक्षक भर्ती में नौकरी दिए जाने की गुहार लगाई है। संगठन ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती में प्रदेश सरकार ने जानबूझकर उनकी समस्या पर आंखें मूंदी एवं गलत नीतियों को अपनाया है। इसी का विरोध जताते हुए वह लोग समाजवादी पार्टी के पक्ष में सहयोग कर रहे हैं। इस सम्बंध में बीएड 2011 अचयनित बेरोजगार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के लोगों अजब सिंह राठौर, बांके बिहारी सोनी, रामलखन कुशवाहा, वीरेंद्र झा, निधि मिश्रा, ऋतु रावत, मनीषा द्विवेदी, अभिनव द्विवेदी, प्रतीक कुमार, रामकेश प्रजापति, कमलेश कुशवाहा, वेदप्रकाश वर्मा आदि के हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नाम संबोधित है जिसमें कहा गया कि डेढ़ लाख अभ्यर्थी जो समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार में निकाले गए 73000 पदों हेतु प्राथमिक शिक्षक भर्ती दिनांक 7-12- 2012 को आवेदन किया गया था। प्रति व्यक्त आवेदन शुल्क 500 रुपए के हिसाब से हर व्यक्ति का तीस हजार से साढ़े सैंतीस हजार कुल 290 करोड़ रुपए आज भी सरकारी खजाने में जमा है। कोर्ट ने भर्ती को सही ठहराया है। पूर्व सरकार भी सदन में विज्ञापन पर भर्ती की बात कह चुकी है। दुर्भाग्य से मामला कोर्ट में लंबित चल रहा था और 25 जुलाई 2017 को जब फाइनल आदेश आया तब भाजपा सरकार आ चुकी थी। भाजपा ने भर्ती सिर्फ यह बोलकर आगे नहीं बढ़ाई कि यह सपा का का मामला रहा है, वह क्यों समाजवादी पार्टी का पाप अपने मत्थे लें। उन्होंने कहा कि वह सभी लोग 10 वर्षों से अनवरत संघर्ष कर रहे हैं। बीजेपी सरकार में 11 बार आंदोलन किया है लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि निकट भविष्य में सपा की सरकार बनने पर उन लोगों के साथ न्याय किया जाएगा एवं भर्ती की जाएगी।

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