उरई | पुलिस के प्रति लोगों के अविश्वास के कारण आये दिन हो रहे बवाल ने सरकार की पेशानी पर बल डाल दिया है | योगी पार्ट टू में क्षति प्रबंधन के लिए जिलों के सीनियर अधिकारियों से समाज के सभी वर्गों में निजी पैठ बना कर पुलिस पर हमले जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का फरमान जारी किया गया है |
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने आज इस क्रम में कलेक्ट्रेट में मीडिया कर्मियों से अत्यंत आत्मीयता पूर्ण माहौल में संक्षिप्त वार्ता की जिसमें स्पेशल समोसे मंगा कर मीडिया कर्मियों की ख़ास आवभगत का इंतजाम किया गया | अधिकारी द्वय ने बताया कि लोगों को यह भरोसा दिलाने की जरूरत है कि सरकार और प्रशासन को उनके प्रति अपनी जवाबदेही का अहसास है और इसमें चूक की हर गुंजायश को रोकने के लिए हम कटिबद्ध हैं | सभी थानों और पुलिस कार्यालय में आगंतुकों के साथ मृदुल व्यवहार होगा और उनकी पीड़ा को दूर करने के लिए संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने का इंतजाम होगा |
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन व पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने इस दौरान बताया कि गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत 20 अभियोगों में 86 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि 14(1) गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 6 प्रकरणों में 2160000 रु0 की संपत्ति जब्त की गई है। गैंगस्टर एक्ट के 4 प्रकरणों में धारा-14(1) के अंतर्गत 2,36,00000 रु0 की जब्त करने की कार्यवाही प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि एनएसए के 07 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है | साथ ही एनएसए के 3 प्रकरण प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि गुंडा एक्ट के अंतर्गत 116 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्यवाही की गई 64 अभियुक्त जिला बदर किए गए। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत 35 अभियुक्तों को गिरफ्तार तथा 1417 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। जिलाधिकारी ने सख्त होते हुए कहा कि कोई भी असामाजिक तत्व अगर लोग शांति व लोक सुरक्षा को भंग करने का प्रयास करेगा तो उसके विरुद्ध निरोधात्मक कार्यवाही की जाएगी।
वैसे लोगों की जिज्ञासा यह है कि सरकार की इस सोच का मंडल , रेंज और ज़ोन में बैठे अधिकारियों पर कितना असर होगा जिन्हें पूरी तरह शहंशाह बना दिया गया है जो न तो कभी जिलों का दौरा करने की जहमत उठाते हैं और न ही फरियादियों से मिलने में विश्वास रखते हैं जबकि इन्हें पहले की सरकारों में नियमित रूप से जिलों का दौरा का कैम्प करना पड़ता था | हर जिले में अच्छे लोगों से वे संपर्क बनाते थे थे जिनके माध्यम से निष्पक्ष फीडबैक हासिल कर वे जिलों में पदस्थ नए अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन दे कर उनकी कार्यशैली को मांजते रहते थे | अब तो सही ढंग से कागजी काम तक करने तक का अभ्यास उनसे छूट गया है इसलिए अकेले ललितपुर जिले मे 2 थानाध्यक्षों ने सरकार का मुंह काला करने के कारनामे अंजाम दे डाले | ये दोनों पहले से बदनाम थे फिर थानों की कमान के लिए इनकी उपयुक्तता तय करने में कोई संकोच क्यों नहीं किया गया |








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