जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने की थी जिलाधिकारी, मण्डलायुक्त व शासन को शिकायत

▪️राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने लगाए थे बीएसए पर पुस्तक घोटाले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

उरई (जालौन) 30 जून। अपनी विवादित कार्यशैली से चर्चा में रहे जालौन के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जालौन प्रेमचंद यादव को आखिरकार पद से हटा दिया गया। बुधवार शाम को शासन द्वारा जारी तबादला सूची में उनको जनपद जालौन से स्थानांतरित कर जनपद बाराबंकी में वरिष्ठ प्रवक्ता डाइट के पद पर भेजा गया है। इसके साथ ही महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद द्वारा ने भी शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी जालौन को पत्र भेजकर बीएसए जालौन के पुस्तक घोटाले की 15 दिवस में जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं जिससे उनके खिलाफ आवश्यक विभागीय कार्यवाही की जा सके। 

विदित हो कि अपने दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जालौन प्रेमचंद यादव द्वारा स्कूली बच्चों को शासन द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली पाठ्य पुस्तकों व कार्यपुस्तिकाओं की छपाई व वितरण में घोटाला कर शासन द्वारा जारी करोड़ो रूपये के बजट   को हजम कर लिया था जबकि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब, साधन विहीन, वंचित समूह के बच्चों को कई विषयों की पाठ्य पुस्तकें व कार्यपुस्तिकाएं सत्रांत तक प्राप्त नहीं हुई, जिससे वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रहे व शिक्षा का अधिकार अधिनियम का हनन  हुआ। अभिभावकों द्वारा जब विद्यालय के प्रधानाध्यापकों से पुस्तके माँगी गई तो प्रधानाध्यापकों द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी को मांग पत्र देकर अवशेष पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की गई। परंतु खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि जब बीएसए द्वारा समस्त पाठ्य पुस्तकें उन्हें उपलब्ध ही नहीं कराई गई है तो वह कहाँ से पूरी पुस्तकें उपलब्ध करा सकते हैं। इस समस्या को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के समक्ष रखा तो उनके द्वारा कहा गया कि शासन द्वारा नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों के लिए अधूरा बजट भेजा गया है। उन्होंने अवशेष पुस्तकें उपलब्ध कराने की जगह बाजार से चौपटिया खरीद कर बच्चों को पढ़ाने की सलाह दी व कहा गया कि अधूरी पाठ्यपुस्तक मिलने में मेरा कोई दोष नहीं है। आप संगठन के माध्यम से शासन से निशुल्क पाठ्य पुस्तकों की मांग करिए। जिसके उपरांत राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने सैकड़ों शिक्षकों के साथ पूर्व सांसद, वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी को इस समस्या के संबंध में अवगत कराया तो उन्होंने इस संबंध में खोजबीन शुरू की जिसके बाद पता चला कि शासन द्वारा बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक हेतु नामांकित बच्चों के सापेक्ष शत प्रतिशत बजट जनपद को भेजा गया है और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी शासन को इस आशय की रिपोर्ट प्रेषित की है कि जनपद में शत प्रतिशत पाठ्य पुस्तकों का वितरण हो चुका है व एक भी छात्र पाठ पुस्तकों से वंचित नहीं है। जिसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी द्वारा जिलाधिकारी, मंडलायुक्त व शासन को इस संबंध में शिकायती पत्र भेजा गया था। जिस के क्रम में जिला स्तर, मंडल स्तर व शासन स्तर से अलग-अलग जांच समितियों का गठन हुआ था। जांच समितियों द्वारा की गई जांच के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा शिक्षकों पर शत प्रतिशत पुस्तकें प्राप्त होने का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का दबाव बनाया गया। जिन शिक्षकों ने इस आशय का प्रमाण पत्र नहीं दिया, उनको तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर परेशान किया गया। कुछ दलाल शिक्षक संगठनों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पक्ष में अपने लेटर पैड पर लिखकर व अपने विद्यालयों में शत-प्रतिशत पुस्तकें पहुंचने की झूठी रिपोर्ट भी बीएसए को सौंपी, जिसे बीएसए ने जाँच अधिकारियों को भी सौंपा। जिससे जांच में हकीकत का खुलासा ना हो सके परन्तु जांच अधिकारियों उन दलाल शिक्षक संगठनों के लैटर पैड नकार दिए। अधिकांश शिक्षकों ने निडर होकर छात्र हित, शिक्षक हित में लिखित रूप से जांच अधिकारियों को अवगत कराया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा उन पर शत प्रतिशत पुस्तकें प्राप्त होने की झूठी रिपोर्ट देने का दबाव बनाया जा रहा है और ऐसा न करने पर कठोरतम कार्रवाई करने की धमकी दी जा रही है। जांच अधिकारियों ने विद्यालयों में जाकर अभिभावकों व बच्चों से पूछ कर जांच की तो अधूरी पाठ्य पुस्तकें प्राप्त होने की शिकायत सच साबित हुई। जिसके बाद जांच अधिकारियों ने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने की रिपोर्ट तैयार की।

बीएसए के भ्रष्टाचार में सहयोगी रहे एडी बेसिक झाँसी भी हटाये गए-:

अपने अधीनस्थ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को बचाने के लिए मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक झांसी एस एन सिंह ने जिन विद्यालयों द्वारा अधूरी पुस्तकें प्राप्त होने के मांग पत्र दिए गए थे उन विद्यालयों का दौरा कर शिक्षकों को डरा-धमका कर शत प्रतिशत पुस्तकें प्राप्त होने की रिपोर्ट न देने पर कठोर कार्यवाही करने की धमकी दी गई और जिन शिक्षकों द्वारा झूठी रिपोर्ट नहीं दी गई उन पर झूठे आरोप लगाकर नियमविरुद्ध उनके वेतन रोक दिये गए। एडी बेसिक झांसी पर निरीक्षण के नाम पर अनियमितता करने के गंभीर आरोप लगे थे। यही नहीं आरोप ये भी था कि वह बीआरसी कार्यालय जाकर वहां के कर्मचारियों से अपनी गाड़ी में डीजल डलवाने हेतु पैसे की मांग करते थे। जिसकी शिकायत जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी द्वारा शासन को की गई थी। शासन द्वारा शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एडी बेसिक ए एन सिंह को पद मुक्त कर डायट कानपुर नगर में उप प्राचार्य के पद पर भेज दिया गया है। मंडल के तीनों जनपदों में निरीक्षण के नाम पर शिक्षकों पर झूठे आरोप लगाकर कार्यवाही करने वाले एडी बेसिक एस एन सिंह के स्थानांतरण से तीनों जनपदों के शिक्षकों में खुशी की लहर है। शिक्षकों द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी को धन्यवाद ज्ञापित किया जा रहा है। 

बीईओ डकोर पर भी लगे  भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप :- 

पुस्तक घोटाले की जांच के दौरान  खण्ड शिक्षा अधिकारी डकोर मुक्तेश कुमार पर शिक्षकों को डरा धमका कर शत प्रतिशत पुस्तकें प्राप्त होने की झूठी रिपोर्ट देने का दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे। खंड शिक्षा अधिकारी डकोर द्वारा पूर्व में भी विद्यालय तक पुस्तके ना पहुंचाने की जगह शिक्षकों पर दबाव बनाकर बीआरसी से स्वयं पुस्तक ले जाने का दबाव बनाने के आरोप लगे थे। जबकि शासन द्वारा विद्यालय स्तर तक पाठ्य पुस्तकें पहुंचाने हेतु प्रतिवर्ष अलग से बजट जारी किया जाता है। बीएसए के भ्रष्टाचार में सहयोगी रहे खंड शिक्षा अधिकारी डकोर मुक्तेश कुमार पर भी शासन का शिकंजा कसने के आसार हैं। शिक्षकों ने उनके भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोर्चा खोलने का संकल्प ले लिया है।

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