बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच ने दिखाया आइना , अतिवृष्टि में गिरे घरों के बेघरों को आज तक नहीं मिले सरकारी आवास

 उरई | पिछले दिनों जिले में आई बाढ़ व बे मौसम बारिश में  गिरे  कच्चे घरों का गृह स्वामियों को आज तक न तो आवास मिला न ही कोई मुआवजा ।

    राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के नेतृत्व में उरई तहसील के दर्जनों गाँवों  के ग़रीब, दलित व बंचित समुदाय के लोगों ने शनिवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन दे कर आवास दिलाने की गुहार लगाई।

  उरई तहसील के डकोर ब्लॉक के चिल्ली, टिमरों, बड़ागांव, सिकरी व्यास, भुआ, सैदनगर, एंधा, बढोली से आये जयदेवी, काशीप्रसाद,कमलेश, रानी ने अधिकारियों से कहा  साहब बारिश  में हमारे  कच्चे  घर गिर गए थे तबसे  हम बरसाती पन्नी तानकर रहे है फिर भी  हमें आज तक किसी योजना में आवास नही मिला है ।

   डकोर ब्लॉक में कार्य कर रही बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच की कार्यकर्ता मधु अनुरागी ने बताया कि हमने जिले के डकोर ब्लॉक के 8 गावँ में जाकर देखा है लोगों के घर पूरी तरह गिर गये है बहुत नुकसान हुआ है, अभी तक उनका  कोई सर्वे भी करने नही गया है न ही उन्हें कोई मुआवजा व आवास मिला |  आज हमने  उपजिलाधिकारी उरई को डकोर ब्लॉक के उक्त  8 गावों के  177 परिवारों की सूची दी है। वही बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के स्टेट कोर्डिनेटर जितेंद्र गौतम ने कहा कि बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन से  बहुत नुकसान हो रहा है, फिलहाल बहुत लोगों के घर गिरे हैं , जिनको   हम लोग जालौन, झांसी व ललितपुर जिलों  में सर्वेक्षण कर चिन्हित कर रहे है ।

   बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक – कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि बुंदेलखंड हमेशा से आपदाओं से ग्रसित रहा है | कभी अति  वर्षा , फिर  सूखा, कभी कुछ क्षेत्र में बाढ़ व बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित दलित वंचित  समुदाय के परिवार होते हैं । बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच पूरे बुंदेलखंड में बाढ़ आपदा/बेमौसम बारिश  प्रभावित परिवारों पर एक अध्यन कर रहा है, उसी के क्रम में आज राष्ट्रीय आपदा निवारण दिवस पर आवास के अधिकार को लेकर अलग अलग जिलों में ज्ञापन दिए गए हैं । आने वाले कुछ दिनों में पूरे सर्वेक्षण व दस्तावेज के साथ तहसील स्तर पर ज्ञापन के माध्यम से दलित व वंचित  समुदाय की मांगों को रखा जायेगा।

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