उरई। स्थानीय राजकीय मेडीकल कालेज में ऊंची दरों पर कमीशनबाजी के लिये दवाओ व इन्जेक्शन की आपूर्ति लेकर सरकार को भारी वित्तीय क्षति पहुंचायी गयी है। यह आरोप मुख्यमंत्री , शासन में मेडीकल शिक्षा के उच्चाधिकारियों, जालौन की डीएम और औषधि नियंत्रण से जुडे जिम्मेदारों को प्रमाण के साथ शिकायत भेजकर की गयी है।
    शिकायतकर्ता ने बताया कि गत 23 मई को मेडीकल कालेज में दवाओ और इन्जेक्शन की आपूर्ति के लिये टेण्डर आमत्रित किये गये थे जिसमें 7 फर्मो ने भाग लिया था। साजिश के तहत जिन चार फर्मो से कम रेट दिये जाने की सम्भावना थी उन्हें तकनीकी मूल्यांकन में अनर्ह करार देकर हटा दिया गया जबकि एक ही लाईजनर की शेष तीन फर्मो के टेण्डर मंजूर करके कमीशन केे लिये उनसे दवाओ व इंजेक्शन की ऊचे दर पर आपूर्ति ले ली गयी ।
      शिकायतकर्ता के मुताबिक इन तीन फर्मो को भी तकनीकी मूल्यांकन में अनर्ह करार दिया जाना चाहिये था क्योंकि इनके द्वारा भी टेण्डर के साथ जरूरी प्रपत्र नहीं लगाये गये थे। उन्होने इन फर्मो की अनियमितता के तौर पर कुछ मिसालें बताई जैसे कि इनको केवल टेबलेट, सीरप का लाइसेन्स है फिर भी इनके द्वारा इंजेक्शन के कोटेशन दिये गये जिन्हें मान लिया गया। इन्होने टेण्डर में केवल 15 दवाओं की सूची दी जबकि 150 दवाओं की आपूर्ति ली गयी। शिकायतकर्ता ने कहा कि मेडीकल कालेज में बडा स्कैम है जिसकी जिम्मेदारी से प्रधानाचार्य बरी नहीं हैं। उन्होने मुख्यमंत्री से उक्त टेण्डर निरस्त करने और प्रधानाचार्य व फर्मो के लाइजनरों खिलाफ धोखाधडी का मुकदमा दर्ज कराने की मांग की । 

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