कृष्ण सुदामा चरित मित्र के लिये न्यौछावर होने की देता प्रेरणा


जगम्मनपुर – उरई। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का आख्यान सच्ची मित्रता के निर्वहन का उत्कृष्ट दृष्टांत है जो समर्थ होने के बाद अपने कमजोर मित्र को न भूलने और आवश्यकता पडने पर दिल खोलकर उसकी मदद करने की प्रेरणा देता है।


      गांव के देवी मन्दिर पर चल रही भागवत कथा के सांतवे दिन बुधवार को कथा वाचक सुशील शुक्ला ने सुदामा चरित के प्रसंग का वर्णन करते हुये कहा कि संसार में मित्रता श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिये। उन्होने एक श्लोक के माध्यम से बताया कि इस दुनिया में चन्दन को सबसे अधिक शीतल माना जाता है जबकि  चन्द्रमा की चांदनी तो चन्दन से भी शीतल होती है। लेकिन एक अच्छा  मित्र चन्द्रमा और चन्दन दोनो से अधिक सुखदायक शीतलता को समाहित किये रहते है।
   उन्होने कहा कि आधुनिक युग में स्वार्थ के लियेे लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं  जो सच्ची मित्रता नहीं होती। मित्रता में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं है और उसका रिश्ता सारे रिश्तो से बडा है। प्रसंगानुसार झांकी टीम ने कृष्ण सुदामा मिलन की सजीव झांकी का दिव्य प्रस्तुतीकरण किया। कथा परीक्षित देवेन्द्र कुमार प्रजापति और उनकी धर्म पत्नी राजकुमारी प्रजापति ने भाव विभोर होकर श्रीमद भागवत कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर रामशंकर , जगदीश टेलर, हरगोविन्द प्रजापति, अमित कुमार, मोहित , ज्ञानेन्द्र कुमार , उमेश , राजाबाबू प्रजापति आदि परिजन तथा गांव के तमाम श्रद्धालुओ ने व्यवस्थाओ में बढ-चढ कर हाथ बटाया ।

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