उरई। ग्राम पचायत के कार्यो में संविदा कर्मी होते हुये भी रोजगार सेवक सबसे पावर फुल बनकर दोनो हाथों से सरकारी बजट लूटने में जुटे हुये हैं । स्थानीय होने के कारण उनके दबदबे के आगे सचिवों को नतमस्तक होना पडता है। अधिकारी इसकी खबर होने के बाबजूद कुछ कर पाने में अपने को असहाय अनुभव कर रहे हैं।
योगी पार्ट -2 में अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामले में सरकार परिदृश्य से लापता होने की स्थिति में पहुंच गयी है जिससे सर्वत्र राम नाम की लूट का माहौल बन गया है। ग्राम पंचायत स्तर तक इसका असर व्याप्त हो चुका है। ग्राम पंचायत के बजट में आज जैसी लूट पहले कभी नहीं मची । खास बात यह है कि पंचायत मित्र जैसे अदने मोहरे ने ग्राम पंचायतों की व्यवस्था को बंधक बना रखा है। अधिकांश ग्राम पचायतों में निर्माण के कार्यो में उन्हीं की तूती बोल रही है।
पचायत मित्रों ने अपने परिवार के लोगों के नाम से डमी फर्मे बना रक्खी हैं। चाहे ग्राम निधि व अन्य निधियो के कार्य हों सचिव इन्हीं की फर्मो के माध्यम से निर्माण सामग्री क्रय करने को बाध्य रहते हैं। इन फर्मो का जीएसटी में समाधान फर्म के रूप में रजिस्टेªशन है। जिसके कारण भारी कर अपवंचन का द्वार खुल गया है और पचायत मित्रों को हर कार्य में बडी रकम के वारे न्यारे का अवसर मिल रहा है। ग्राम पंचायत के कार्यो में घोषित रूप से ठेकेदारी प्रथा की इजाजत न होने के बाबजूद व्यवहारिक तौर पर रोजगार सेवकों की ठेकेदारी को मान्यता मिली साफ दिखाई दे रही है। जागरूक नागरिक समाज के अध्यक्ष गजेन्द्र ंिसंह चौहान ऊमरी ने ग्राम पंचायतों में विकास के बजट के हडपे जाने के इस सिलसिले को करदाताओं से विश्वासघात बताया है जो विकास के लिये सरकार द्वारा किये जाने वाले संग्रह में बडे योगदान के लिये विवश किये जा रहे है। भ्रष्टाचार विरोधी ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष रामजी गुर्जर ने योगी सरकार से कागजी घुडकियों के बजाय अमली रूप में भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत तक इसका निरकुंश विस्तार चिन्ता का विषय है।

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