उरई ।  अमर क्रान्तिकारी शहीदे आजम  भगत सिंह के 92 वें   शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर  भगत सिंह आन्दोलन समिति के तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गयी | विषय था , भगतसिंह और उनका वैज्ञानिक समाजवाद ।

गोष्ठी में बोलते हुए शिक्षक संघ के नेता गिरंद सिंह ने कहा कि  अगर आज देश में पूंजीवादी व्यवस्था के बजाय अगर शहीद भगतसिंह के वैज्ञानिक समाजवाद   पर आधारित व्यवस्था को लागू कर दिया जाता तो देश भर का नौजवान और मजदूर किसान सुखी और समृद्ध होता ।

इप्टा के देवेंद्र शुक्ल जी ने  भगत सिंह के जज्बे और साहस को सैल्यूट करते हुए कहा कि भगतसिंह एक  देशभक्त होने के साथ ही साथ एक बहुत ही बड़े विचारक भी थे ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे  वरिष्ठ पत्रकार भाई के पी सिंह ने कहा किशहीद ए आजम भगतसिंह आज भी हमारे देश के छात्रों नौजवानों के लिए सबसे बड़े हीरो हैं जिनके विचारों को भी जानना नयी पीढ़ी के लिए जरूरी है |

समाजवादी नेता अशोक गुप्ता ने कहा  शहीद भगत सिंह देश को आजाद कराने के साथ ही देश में समाजवादी व्यवस्था को लागू करने के पक्षधर थे और पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था की लूट और शोषण की नीति के खिलाफ थे ।

कॉमरेड रामसिंह ने कहा आज देश में पूंजीवादी व्यवस्था की देन है कि किसान,  मजदूर अपना जीवन निर्वाह भी ढंग से नहीं कर पा रहा है  | लूट और शोषण पर टिकी हुई इस व्यवस्था को बदलने के लिए लोगों को  एक जुट हो जाना चाहिए ।

कार्यक्रम के समापन पर  सभी वक्ताओं को धन्यवाद देते हुए  भगत सिंह आन्दोलन समिति के संयोजक  अतुल कुमार कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हमें , गांव कस्बों में जाकर भगत सिंह के क्रान्तिकारी विचारों का प्रचार प्रसार करना होगा |  तभी देश में वैज्ञानिक समाजवाद के राज की स्थापना का भगत सिंह का सपना साकार हो सकेगा ।

सी पी आई के सचिव विनय पाठक ने भगत सिंह से संबंधित पुस्तकों के लिए एक लाईब्रेरी के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया ।

रंगकर्मी राज पप्पन ने , क्रान्तिकारी गीत की प्रस्तुति से  भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी ।

अन्य वक्ताओं में कुलदीप चतुर्वेदी , प्रभुदयाल , गोपाल मिश्र , मनोज अहिरवार , बबलू शर्मा , परशुराम अजनारी , राजीव कुशवाहा , आदित्य आटा , का . हरिशंकर , नारायण दास अहिरवार , आदि ने भी शहीद भगत सिंह को याद करते हुए अपने विचार  रखे ।

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