–रवि पटेल
22 सितंबर को आने वाली नई GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) मे कटौती होने के बाद 28% अधिकतम की टैक्स की दर घटकर 18 % अधिकतम की हो जाएगी जिसमे कई तरह के समान सस्ते हो जायेगे आखिर सरकार को 8 साल बाद इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी ?
सबको पता है अमेरिका के भारत पर 50% टैरिफ लगाने से भारत का सामान अमेरिका में बहुत महंगा हो जायेगा जिसके चलते अब भारत का अमेरिका को होने वाले समान का एक्सपोर्ट घटेगा , अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में होने वाला नुकसान लगभग 3 लाख करोड़ का है जिसमे कपड़े ज्वेलरी मसाले प्रमुख है जिनके उत्पादन मे काफी मानव संसाधन लगता है, एक्सपोर्ट के नुकसान से लोगो की नौकरी जाएगी लोगों की आय घटेगी जिससे अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।
अमेरिका मे एक्सपोर्ट होने वाले सामानो की कमी के कारण हमारे उत्पादन सरप्लस हो जायेगे जिनको खपाने के लिये भारत दूसरे बाजारों को इतने आसानी से एक्सपोर्ट नही कर पायेगा क्यो कि अमेरिका के सारे देशो पर टेरिफ लगाने से सारे देशो में सरप्लस उत्पादन है जिसे बाजार चाहिए।
सबसे पहला रास्ता बचता है अपने ही घरेलू बाजार को बड़ा बनाया जाये और मांग को बढ़ाया जाये यह तभी संभव है जब कीमतों को कम किया जाये कीमत कम करने का सबसे बड़ा उपाय है टैक्स कम किया जाये जिस कारण से GST की दरों को कम किया गया है।
दूसरा रास्ता है लोगो के पास पैसा पहुंचे जिससे वह अधिक खर्च करे ,
पर वर्तमान भारत की बेरोजगारी की दर और अर्थव्यवस्था की हालत यह है कि लोगो के पास पैसा नही है घर चलाना मुश्किल हो गया है वो पैसा खर्च नही कर सकते ।
सरकार के इस GST टैक्स की कम दरों से संगठीत झेत्र के सामानों की कीमत मे कमी आयेगी क्यो की GST असंगठित झेत्र पर नही लगता है ( सब्जीवाले, किसान इत्यादि) असंगठित झेत्र जिसमे 94% लोग काम करते है उनके उत्पादन की कीमत तो गिरेगी नही उनकी आमदनी उतनी ही रहेगी जिससे मांग बढ़ाने के लिये 94% लोगो का GST की नई दरों से कोई सरोकार लगभग नही रहेगा।
GST की दरों को कम करने से लगभग भारत सरकार की आय मे 48000 करोड़ की गिरावट होगी निश्चित तौर पर राज्यो को कम पैसा भारत सरकार देगी जिससे राज्यो द्वारा नया टैक्स लगाया जा सकता है।
क्या यह कदम भारत के लगभग 5 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट नुकसान के बराबर घरेलू मांग को बड़ा पाएंगे ?
पर सवाल है हमारे उद्योगों को कच्चा माल चीन से मिलता है जिससे हमारे उद्योग चलते है जिनके बिना हमारी अर्थव्यवस्था चल नहीं सकती, जिसने मजबूर कर दिया प्रधानमंत्री को चीन जाने के लिये ऑपरेशन सिन्दूर की यादें जन मानस मैं ताजी है हम लगभग 100 बिलियन डॉलर का आयात चीन से करते है चीन के पास कच्चामाल है मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया का योगदान अर्थव्यवस्था मे होता तो हमारी नियति इतनी नाजूक न होती GST की नई दरो का गाजे बाजे से स्वागत किया जा रहा है मीडिया मास्टरस्ट्रोक बता रहा है राह कठिन है जनता कई मास्टरस्ट्रोक से इस हालत मे है तैयार रहिये इस मास्टरस्ट्रोक के परिणामो के लिये यही नियति है।








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