उरई/जींद। चर्चित विजेंद्र अपहरण कांड की जांच एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद लगभग ठहर सी गई है। अपहृत विजेंद्र के पुत्र अमन द्वारा मीडिया को भेजे गए पत्र में जहां पिता की सकुशल बरामदगी की गुहार लगाई गई है, वहीं जांच की धीमी पड़ चुकी रफ्तार पर भी चिंता जताई गई है।
पत्र में अमन ने उल्लेख किया है कि उसके पिता विजेंद्र का बीती 5 मई की सुबह कथित रूप से उरई क्षेत्र में जालौन रोड पर रनिया फाटक के पास खेत की ओर जाते समय अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि सफेद रंग की कार से पहुंचे कुछ लोग उन्हें जबरन अपने साथ ले गए। पत्र में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है, जिन पर परिवार को अपहरण में संलिप्त होने का शक है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उरई पुलिस ने शुरुआत में जांच को काफी गंभीरता से लिया था। सुराग जुटाने और दबिश देने के लिए पुलिस की एक टीम हरियाणा भेजी गई थी। लेकिन जांच के दौरान ही टीम के चार पुलिसकर्मी तथा विजेंद्र के भाई की एक भीषण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे पुलिस विभाग को गहरे सदमे में डाल दिया।
बताया जाता है कि इस अनहोनी के बाद जांच की रफ्तार अचानक थम गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद अधिकारियों के भीतर दोबारा हरियाणा में उसी स्तर पर टीम भेजने को लेकर मानसिक दबाव और हिचक की स्थिति बनी हुई है। नतीजतन मामला लंबे समय से लगभग डेडलॉक की स्थिति में पहुंच गया है।
उधर विजेंद्र के परिजन लगातार बढ़ती बेचैनी के बीच पुलिस कार्रवाई दोबारा तेज होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पुत्र अमन ने मीडिया को भेजे पत्र में कहा है कि परिवार आज भी विजेंद्र की वापसी की प्रतीक्षा कर रहा है और जांच में आई ठहराव की स्थिति ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। उसने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मामले में फिर सक्रियता दिखाते हुए जांच आगे बढ़ाने और उसके पिता की बरामदगी सुनिश्चित करने की मांग की है।







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