5 मार्च 1971 को लखनऊ में जन्मी अनुपम कुलश्रेष्ठ (1995 बैच, UP कैडर IPS) आज उत्तर प्रदेश पुलिस की उन गिने-चुने महिला अधिकारियों में शुमार हैं, जिनकी जिंदगी सेवा, बलिदान, प्रेम, हानि और पुनर्निर्माण की मार्मिक मिसाल है।
सपनों का शुरूआती सफर और अनमोल प्यार
पुलिस अधिकारी पिता की बेटी अनुपम ने शिक्षा पूरी कर (M.A. Political Science, Master’s in Police Management, M.Phil.) 28 दिसंबर 1995 को IPS जॉइन की। नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान उन्हें अपने बैचमेट, अजय कुमार सिंह (भी IPS अधिकारी) से मुलाकात हुई। दोनों सोलमेट थे। जिंदगी खूबसूरत, परफेक्ट और खुशहाल थी। शादी हुई, एक बेटा हुआ और सब कुछ सपनों जैसा लग रहा था।
लेकिन 4 अक्टूबर 2000 को अचानक तूफान आ गया। अनुपम मात्र 29 वर्ष की थीं और उनका बेटा सिर्फ एक साल का था, जब उनके पति शहीद अजय कुमार सिंह की बिहार के नक्सल प्रभावित लोहागड़ा (बेगूसराय क्षेत्र) में ड्यूटी के दौरान शहादत हो गई।
उस दिन अनुपम ने यूनिफॉर्म पहनकर पति को अंतिम विदाई दी, सलामी ली और पूरे देश को दिखा दिया कि एक पुलिस अधिकारी की पत्नी कितनी मजबूत हो सकती है। बेगूसराय में आज भी शहीद अजय कुमार सिंह के नाम पर सड़क का नामकरण है, जिसका अनावरण खुद अनुपम ने किया।
अकेले मां-बाप बनकर ड्यूटी संभाली
शहादत के बाद अनुपम ने ड्यूटी नहीं छोड़ी। रात की पेट्रोलिंग पर निकलते समय बेटे की चिंता दिल में लिए, वे मैदान में डटी रहीं। सिंगल मदर के रूप में उन्होंने बेटे को पाला, पढ़ाया और परिवार की जिम्मेदारी संभाली। यह दौर उनकी सबसे बड़ी परीक्षा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
पुनर्निर्माण: री-मैरिज और ब्लेंडेड फैमिली
समय के साथ उन्होंने खुशी को दूसरा मौका देने का साहस किया। उनका दूसरा विवाह दो परिवारों का विवाह था। नया पति भी विधुर था — उसकी पिछली पत्नी का निधन हो चुका था और दो बच्चे थे। अनुपम के बेटे के साथ मिलाकर उन्होंने एक ब्लेंडेड फैमिली बसाई। शुरुआती संघर्ष के बाद यह परिवार एक-दूसरे का सहारा बना।
जब उनके पति को मेटास्टैटिक कैंसर हुआ, तो अनुपम ने उनका हाथ थामकर वादा किया — “हम साथ लड़ेंगे”। दोनों ने मिलकर कैंसर को हराया। पति का अटूट समर्थन आज भी उनकी ताकत है।
प्रोफेशनल यात्रा: ट्रेनर से कानपुर जोन तक
NPA हैदराबाद: Course Director के रूप में सैकड़ों IPS अधिकारियों को ट्रेनिंग दी।
CRPF: IG (Works/Provisioning) के रूप में केंद्रीय भूमिका निभाई।
UP Police: ADG Traffic & Road Safety, फिर Agra Zone की पहली महिला ADG (2023)।
21 मई 2026: कानपुर जोन की ADG के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली।
कानपुर जोन (कानपुर नगर, देहात, औरैया, जालौन, इटावा, फतेहगढ़, कन्नौज आदि) जैसे औद्योगिक और संवेदनशील क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, महिला-बाल सुरक्षा, कम्युनल सद्भाव और जन सुरक्षा उनकी प्राथमिकता रहेगी।
सम्मान
President’s Police Medal for Meritorious Service (2011)
President’s Police Medal for Distinguished Service (2022)
उत्कृष्ट सेवा पदक और अनेक सम्मान
प्रेरणा का सार — “Turning the Tide: Choosing Happiness”
अपनी TEDxLucknowLive टॉक में अनुपम कहती हैं — “तूफान आएंगे, लेकिन खुशी चुनने का फैसला कभी मत छोड़ो।” शहीद पति अजय कुमार सिंह की याद उन्हें हर कदम पर प्रेरित करती है। उन्होंने दिखाया कि दर्द को ताकत में बदला जा सकता है, ड्यूटी और परिवार दोनों को संभाला जा सकता है।
कानपुर जोन की नई ADG अनुपम कुलश्रेष्ठ आज हजारों महिलाओं, सिंगल मदर्स और पुलिसकर्मियों के लिए जीती-जागती मिसाल हैं — कि शहीद की पत्नी सिर्फ याद नहीं, बल्कि सेवा और संकल्प का प्रतीक भी बन सकती है।
“अजय अमर हो गए, और मैं उन्हीं की प्रेरणा से जीती हूं।” — अनुपम कुलश्रेष्ठ






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