उरई। मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हुए विवाद के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति का शुक्रवार को पटाक्षेप हो गया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह स्वयं मेडिकल कॉलेज पहुंचकर हड़ताली जूनियर डॉक्टरों से मिले और उन्हें आश्वस्त किया कि किसी भी जूनियर डॉक्टर के कैरियर के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। अधिकारियों की पहल और भरोसे के बाद जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी।
मेडिकल कॉलेज परिसर में डॉक्टरों से बातचीत के दौरान डीएम और एसपी ने पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से चर्चा की। अधिकारियों ने कहा कि मरीजों, तीमारदारों और डॉक्टरों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में हाल के दिनों में बच्चों से जुड़े प्रकरण की जांच के लिए त्रिस्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी स्तर पर की जा रही है, जबकि इसमें एक आईपीएस अधिकारी और एक विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉक्टर को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि समिति पूरे घटनाक्रम के कारणों की विस्तृत जांच करेगी और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एसओपी और कार्ययोजना तैयार करेगी। जांच रिपोर्ट में प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डीएम ने कहा कि प्रशासन चाहता है कि मेडिकल कॉलेज का माहौल पूरी तरह सामान्य और सुरक्षित रहे, जिससे डॉक्टर निर्भय होकर अपनी सेवाएं दे सकें और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।
पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने कहा कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर पुलिस द्वारा समन्वित कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर भ्रामक और तनाव भड़काने वाली पोस्टों पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो माहौल खराब करने का प्रयास करेंगे।
अधिकारियों की मौजूदगी और आश्वासन के बाद जूनियर डॉक्टरों ने काम पर लौटने की घोषणा कर दी, जिससे मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं पुनः सुचारु हो गईं।



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