दवा व्यवस्था की सराहना, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी से तीमारदारों में नाराजगी
कालपी-उरई। सरकार जहां सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज, मुफ्त दवाएं और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं कालपी के सरकारी अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारदारों को अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और गर्मी से राहत की समुचित व्यवस्था न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि बीमारी और दर्द के समय दवा जितनी जरूरी होती है, उतनी ही आवश्यकता स्वच्छ पानी, साफ शौचालय और बैठने-रुकने की सुविधाओं की भी होती है। लेकिन अस्पताल परिसर में इन व्यवस्थाओं की हालत कई बार अव्यवस्था की तस्वीर पेश करती नजर आती है।
लोगों का आरोप है कि अस्पताल के शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती और कई बार शौचालयों के गेट पर ताले तक लटके मिलते हैं। भीषण गर्मी में अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को पर्याप्त हवा और साफ वातावरण न मिलने से भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर पंखे और कूलर भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं, जिससे वार्डों और प्रतीक्षालयों में उमस बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल की देखरेख और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर है, क्या वे इन समस्याओं से अनजान हैं या फिर लापरवाही अब व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है। लोगों का आरोप है कि जब भी मीडिया या सामाजिक संगठनों द्वारा मुद्दा उठाया जाता है, तभी कुछ समय के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई देती हैं, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
हालांकि अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की सेवाओं और मरीजों को दवा वितरण व्यवस्था की लोग सराहना भी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद जनसुविधाओं की बदहाल स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर रही है। लोगों का कहना है कि सरकार की मंशा गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी स्तर पर छोटी-छोटी लापरवाहियां सरकार की छवि को धूमिल कर रही हैं।
खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है। नागरिकों और मरीजों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन नियमित निरीक्षण कर पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई तथा पंखे-कूलर जैसी सुविधाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों और तीमारदारों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में केवल दवा ही नहीं, बल्कि मानवीय और मूलभूत सुविधाओं का बेहतर होना भी उतना ही आवश्यक है।



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