टीईटी से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत देने की मांग, सांसद प्रतिनिधि को सौंपा ज्ञापन

उरई। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की जालौन इकाई ने गुरुवार को सांसद कार्यालय पहुंचकर सांसद नारायणदास अहिरवार के नाम संबोधित ज्ञापन उनके प्रतिनिधि राजू अहिरवार को सौंपा। ज्ञापन में टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने तथा इसके लिए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम में आवश्यक संशोधन की मांग की गई।

जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने कहा कि नियुक्ति के बाद बनाए गए पात्रता मानकों को पूर्व में विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इससे लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि ये शिक्षक वर्षों से शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

जिला महामंत्री इलयास मंसूरी ने कहा कि 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त लाखों शिक्षकों में असमंजस और चिंता का माहौल है। उन्होंने सांसद से अनुरोध किया कि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक लाभ सुरक्षित रखने के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाने की पहल की जाए।

प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। विभिन्न जिलों में सांसदों को ज्ञापन सौंपकर सरकार से शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर संवेदनशील और न्यायोचित निर्णय लेगी।

इस अवसर पर जिला सदस्यता प्रभारी रियायत बेग, सारिक अंसारी, अमित यादव, अभिषेक पुरवार, राजेंद्र सोनी, अरविंद निरंजन, कृष्णगोपाल सिंह, शिल्पी नगाइच, दीपिका चौहान, विनयदीप तिवारी, नवनीत श्रीवास्तव, शैलेन्द्र सिंह चौहान, सौरभ सोनी, नेहा परवीन, कल्पना, चेनूबाद सहित संगठन के जिला, ब्लॉक एवं नगर इकाइयों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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