मानव-वानर संघर्ष रोकने की प्रकृति आधारित पहल, फलदार पौधों से विकसित होंगे हरित क्षेत्र

उरई। नगरीय क्षेत्रों में बंदरों के बढ़ते आवागमन और मानव-वानर संघर्ष की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में जिला प्रशासन ने प्रकृति आधारित पहल शुरू की है। बंदरों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर उनके प्राकृतिक परिवेश में पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूरे जनपद में करीब 50 कपि वन वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में कपि वन वाटिकाओं में कराए जा रहे पौधरोपण, पूर्व में लगाए गए पौधों की स्थिति और उनके संरक्षण की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वाटिकाओं के विकास एवं संरक्षण के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि कपि वन वाटिकाओं का उद्देश्य केवल पौधरोपण करना नहीं, बल्कि बंदरों के लिए ऐसा प्राकृतिक आवास तैयार करना है, जहां उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आश्रय मिल सके। इससे भोजन की तलाश में बंदरों के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की जरूरत कम होगी और मानव-वानर संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आएगी।

उन्होंने निर्देश दिए कि नगरीय क्षेत्रों के समीप कम से कम एक हेक्टेयर भूमि में विकसित किए जा रहे कपि वन में बंदरों के लिए उपयोगी एवं फलदार प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। इनमें आम, जामुन, अमरूद, कटहल, बड़हल, बेल, गूलर और बेर जैसे वृक्ष लगाए जाएं, ताकि भविष्य में वाटिकाएं बंदरों के लिए प्राकृतिक भोजन और आश्रय का स्थायी केंद्र बन सकें।

जिलाधिकारी ने पूर्व में लगाए गए पौधों की सर्वाइवल रेट की समीक्षा करते हुए प्रत्येक पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जीवित पौधों की नियमित सिंचाई और देखभाल की जाए तथा मृत या क्षतिग्रस्त पौधों के स्थान पर तत्काल नए पौधे लगाए जाएं। कपि वन की सुरक्षा के लिए आवश्यक बाड़बंदी और अन्य संरक्षण उपाय भी प्रभावी ढंग से किए जाएं।

उन्होंने कहा कि पौधरोपण की सफलता केवल पौधे लगाने में नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने में है। इसलिए प्रत्येक कपि वन वाटिका की नियमित निगरानी और पौधों की स्थिति का निरंतर अनुश्रवण किया जाए। उन्होंने इन वाटिकाओं को केवल एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

जिला प्रशासन इन वाटिकाओं के संरक्षण में जनभागीदारी को भी बढ़ावा देगा। ‘मेरी वाटिका, मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ लोगों को इन हरित स्थलों और पौधों की देखभाल से जोड़ने की योजना है।

करीब 50 कपि वन वाटिकाओं के विकास की यह पहल जनपद में हरित क्षेत्र के विस्तार के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्राकृतिक भोजन और आश्रय उपलब्ध होने से बंदरों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर अनावश्यक आवागमन कम होने की उम्मीद है।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह जादौन, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद सहित संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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